
महिलाओं में बांझपन का कारण बन सकती हैं पानी की सस्ती बोतलें
आगरा। प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबन्धन के लिए 6आर का सूत्र है। प्लास्टिक का रिड्यूस, रीयूज, रिफ्यूज, रिमूव, रिसाईकल एवं रैली जैसे 6 बिन्दुओं पर ध्यान देने की आवश्यकता है। साथ ही पर्यावरण मित्र वस्तुओं जैसे वुडन कटलरी, पत्तल, कपड़ों के थैले, कांच की बोतल आदि के द्वारा प्लास्टिक की बनी हुई वस्तुओं के स्थान पर प्रयोग कर प्लास्टिक के प्रयोग को हतोत्साहित कर सकते हैं। यह विचार हैं दयालबाग डीम्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. अरुण प्रताप सिकरवार के। वह आगरा कॉलेज की एनसीसी आर्मी विंग एवं बायोटेक विभाग द्वारा आयोजित एक दिवसीय सेमिनार में बतौर मुख्य वक्ता अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।
डॉ. सिकरवार ने कहा कि पानी की सस्ती बोतलों में पीईटी (PET) नाम का घातक रसायन होता है। साथ ही बिस फिनोल-ए नाम का रसायन पानी में निरन्तर नैनों कणों के रूप में लीक होकर हमारे शरीर में माइक्रोग्राम मात्रा में एकत्रित हो जाता है, जो मानव के हार्मोन को प्रभावित करता है। इसके कारण पुरुषों में इंपोटेंसी व महिलाओं में बांझपन की समस्या हो सकती है।
उन्होंने प्लास्टिक के विकल्प के रूप में प्लान्ट बेस्ड प्लास्टिक के प्रयोग पर बल दिया। कहा कि अमेरिका में मक्का से पॉली लैक्टिक एसिड लेकर मोल्डेबिल व अन्य पदार्थ का निर्माण कर वस्तुएं बनायी जा रही हैं, जो एक माह के अंदर अपघटित हो जाती है। स्वीडन की फर्नीचर बनाने की मशहूर कम्पनी पॉली स्टाईरिन पैकेजिंग’ के स्थान पर मशरूम से जैव अपघटित पैकेजिंग Eco Cradle (ईको क्रेडल) तैयार कर रही है, जो पांच से छह दिन में अपघटित हो जाती है। आने वाले दो वर्षों में एक बार में प्रयुक्त पानी की बोतलों के विकल्प के रूप में ’सी विड’ से बनी पानी की बॉल व दूध के केसिन प्रोटीन से बनी बॉल ले लेंगी।
नहीं जागे तो पीढ़ियां माफ नहीं करेंगी
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित ब्रिगेडियर मनोज मोहन ने उपस्थित कैडेट्स एवं विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज सम्पूर्ण विश्व में प्लास्टिक मानव के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। प्लास्टिक के बिना आज के इस भौतिक जीवन की कल्पना करना भी असंभव है। लेकिन इस अभिशाप को हमारे युवा एव वैज्ञानिक अपने नवाचारों के माध्यम से प्लास्टिक कचरे को मानवता के लिए वरदान के रूप में भी बदल सकते हैं। उन्होंने प्लास्टिक कचरे के रिसाईकल कर उसके उपयोग में लाने पर जोर देते हुए कहा कि प्लास्टिक कचरे का उपयोग के साथ उसके प्रबन्धन की भी अत्यंत आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि हम आज नहीं जागे तो आने वाली पीढ़िंया हमें माफ नहीं करेंगी। इसलिए परिवर्तन की प्रतीक्षा नहीं करो, वरन् स्वयं परिवर्तन के वाहक बनो।
प्रकृति से अधिक स्वयं का नुकसान
अध्यक्षीय उद्बोधन में आगरा कॉलेज के प्राचार्य डॉ. विनोद कुमार माहेश्वरी ने कहा कि आसानी से उपलब्ध होने के कारण प्लास्टिक निर्मित वस्तुओं का अधिक प्रयोग किया जाता है। प्लास्टिक को समाप्त करने के लिए इसका उचित विकल्प ढूंढना होगा। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक बेस्ट मैनेजमेंट करना होगा। हम प्रदूषण करके प्रकृति से अधिक स्वयं का नुकसान कर रहे हैं।
स्वच्छता पखवाड़ा की रिपोर्ट
अतिथियों का स्वागत आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं कम्पनी कमाण्डर लेफ्टिनेंट अमित अग्रवाल ने ने किया। आभार बायोटैक विभाग के अध्यक्ष डॉ. अशोक उपाध्याय ने किया। उद्घाटन समारोह का संचालन कार्पोरल तनिष्का माथुर एवं समापन समारोह का संचालन तान्या जैन ने किया। समारोह में विशिष्ट अतिथि 1 उ0प्र0 एनसीसी के कमान अधिकारी कर्नल ओपी पाण्डेय ने 1 से 15 दिसम्बर तक चल रहे स्वच्छता पखवाड़ा की विभिन्न गतिविधियों पर प्रकाश डाला।
तकनीकी सत्र
इससे पूर्व सेमिनार का शुभारम्भ एनसीसी आगरा ग्रुप कमाण्डर ब्रिगेडियर मनोज मोहन एवं प्राचार्य डॉ विनोद कुमार माहेश्वरी ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया। अतिथियों का स्वागत डॉ. प्रशान्त पचैरी, डॉ. नीता रानी, शिवानी, नितिन भारद्वाज, कनिका गोयल, अनिकेत शर्मा ने किया। अण्डर ऑफीसर ज्योति ने स्वच्छता पखवारे पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। सेमिनार के तकनीकी सत्र में कैडेट्स एवं अन्य प्रतिभागियों ने विषय से सम्बन्धित 26 ओरल तथा 35 पोस्टर पर अपने-अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। प्लास्टिक अपशिष्ट को मानवता के लिए अभिशाप बताया। तकनीकी सत्रों में ओरल प्रस्तुति के निर्णायक मण्डल में डॉय मनोज कुमार रावत, डॉ. संध्या अग्रवाल एवं डॉ. अंशुल अग्रवाल रहे। पोस्टर प्रस्तुति में मेजर आरके सिंह, डॉ. सत्यदेव शर्मा एवं डॉ. दिव्या अग्रवाल ने सर्वोत्तम प्रस्तुतियों का चयन किया।
विजेताओं को किया पुरस्कृत
सेमिनार के समापन समारोह में ओरल प्रस्तुति में कबीर चटवाल को प्रथम, शिवा अग्रवाल द्वितीय व हनी शर्मा तृतीय तथा पोस्टर प्रस्तुति में आशुतोष झा एवं विकास कुमार संयुक्त रूप से प्रथम, अमित कुमार को द्वितीय एवं कैडेट अंजलि को ततीय पुरस्कार प्रदान किये गये। अन्त में शोध-पत्र प्रस्तुत करने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किये गये। सेमिनार में गुलफान, कबीर चटवाल, चेतन, कृष्णवीर, शिवम, सुहाना खान, हिमांशु, प्रांजल शर्मा, यश नायक, शिवानी अहिरवार, संतोष ओली, समरजीत, अरुण प्रताप सिंह, अर्चना राजपूत, सचिन भगौर, प्रशान्त चौधरी, उत्सव सिंघल, विपाशा सिंह, मोनू, रितिक दुबे, अमित कुमार, आदि ने व्यवस्थाएं सम्भालीं। समारोह के दौरान अतिथियों के स्वागत हेतु पुष्प गुच्छ पुरानी अपषिष्ट प्लास्टिक का प्रयोग करके बनाया गया।
Published on:
14 Dec 2019 10:07 am

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