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क्या है राधास्वामी मत, जानिए दादाजी महाराज से

राधास्वामी मत के अधिष्ठाता और आगरा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति, इतिहासवेत्ता, समाज सुधारक प्रो. अगम प्रसाद माथुर (दादाजी महाराज) ने पत्रिका के माध्यम से राधास्वामी मत के बारे में जानकारी दी है।

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Bhanu Pratap Singh

Jun 11, 2016

dadaji maharaj

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आगरा। राधास्वामी मत के अधिष्ठाता और आगरा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति, इतिहासवेत्ता, समाज सुधारक प्रो. अगम प्रसाद माथुर (दादाजी महाराज) ने पत्रिका के माध्यम से राधास्वामी मत के बारे में जानकारी दी है।

जीव का सच्चा उद्धार होता है
उन्होंने कहा- राधास्वामी मत तो एक मार्ग है, जिसमें जीव का सच्चा उद्धार यानि मुक्ति प्राप्ति हो सकती है। यहां के जो सुख-दुख हैं, उनसे सच्चा निर्वाण हो सकता है, मालिक के देश में जा सकते हैं। यह प्रेम और भक्ति का मार्ग है। इसके अंदर सुरत शब्द योग की पद्धति अपनाई जाती है और उसको बहुत विस्तारपूर्वक कहा गया है। अभ्यास बिना प्रेम औऱ भक्ति के नहीं पा सकता है। मत का संदेश प्रेम का संदेश है।

सबको मिलकर चलने की बात
दादाजी ने बताया कि राधास्वामी मत में संकीर्ण राजनीति है, संकीर्ण सामाजिक व्यवस्था है, जो मतभेद है, इन सबका तिस्कार किया गया है। सबको मिलकर चलने की बात कही गई है। भाईचारा हो, अलगाववाद नहीं। ये आज की अत्यंत आवश्यकता है, विशेषकर भारतवर्ष में तो इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि भारत तो नेतृत्वकर्ता है, उसकी संस्कृति को अक्षुण्ण बनाए रखना चाहिए।

क्यों गड़बड़ा रही व्यवस्था
दादाजी ने कहा कि हम कोशिश करते हैं कि जातिवाद न पनपने पाए। समाज संगठित हो। एक दूसरे का विरोध विशुद्ध मानवता के विरुद्ध है। इसके मूल कारण में चुनाव का जो ढंग है, वह दोषपूर्ण है। उसमें क्या होता है कि जातिवाद को और बढ़ावा दिया जाता है। समाज को और विघटित किया जाता है। चुनाव से पहले झगड़े और चुनाव के बाद झगड़े, ये तो प्रजातंत्रवाद नहीं है। ये तो सभ्य समाज के संकेत नहीं है। इससे आर्थिक विकास में रोड़ा बनता है। सबसे बड़ी बात है सामाजिक न्याय नहीं है, भाईचारा नहीं है, मेल नहीं है। ये व्यवस्था समय रहते परिवर्तित करनी चाहिए।

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