दादाजी ने बताया कि राधास्वामी मत में संकीर्ण राजनीति है, संकीर्ण सामाजिक व्यवस्था है, जो मतभेद है, इन सबका तिस्कार किया गया है। सबको मिलकर चलने की बात कही गई है। भाईचारा हो, अलगाववाद नहीं। ये आज की अत्यंत आवश्यकता है, विशेषकर भारतवर्ष में तो इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि भारत तो नेतृत्वकर्ता है, उसकी संस्कृति को अक्षुण्ण बनाए रखना चाहिए।