
milk in sawan
आपने अपने आसपास ऐसे बहुत से लोगों को देखा होगा जो सावन के महीने में दूध और दूध से बनी चीजें जैसे दही, छाछ, पनीर आदि लेना छोड़ देते हैं। हो सकता है कि उनको देखकर कई बार आप भी खुद ऐसा करते हों, लेकिन ऐसा क्यों किया जाता है, इसका कारण न जानते हों। आइए हम आपको बताते हैं कि ऐसा क्यों किया जाता है।
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ये है असली वजह
आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. रमाकांत शर्मा का कहना है कि सावन में दूध न पीने की सलाह आयुर्वेद में दी गई है। दरअसल इस माह में बारिश के कारण जगह जगह कीड़े मकोड़े घूमते हैं। ऐसे में गाय जब घास खाती है तो घास के साथ कई कीड़े मकोड़े भी खा जाती है। इस कारण उसके दूध में हानिकारक तत्व मिल जाते हैं। ऐसे में जब उस दूध का सेवन हम करते हैं तो कई तरह की परेशानियां होने का खतरा रहता है। वहीं अक्सर मॉनसून में लोगों का इम्यून सिस्टम और पाचन तंत्र भी कमजोर हो जाता है। इसके कारण दूध और दूध से बनी चीजों का सेवन पेट संबन्धी तमाम समस्याएं जैसे अपच, गैस, एसिडिटी, उल्टी, दस्त आदि तमाम उत्पन्न कर देता है। इसलिए इस माह में दूध और दूध से बनी चीजों को लेने के लिए मना किया गया है। इस कारण को धार्मिक मान्यताओं से जोड़कर सावन के महीने में दूध भगवान शिव को अर्पित करने की सलाह दी गई है।
Published on:
17 Jul 2019 05:54 pm

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