Bank Manager Murder Case: यूपी के आगरा जिले में 12 अक्टूबर को हुई बैंक प्रबंधक की हत्या में नामजद पत्नी और ससुर को पुलिस ने प्रयागराज से गिरफ्तार कर लिया है। दोनों पिता-पुत्री हाईकोर्ट से एंटीसिपेटरी बेल लेना चाहते थे।
Bank Manager Murder Case in Agra: उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के ताजगंज थानाक्षेत्र स्थित रामरघु एग्जॉटिका में रहने वाले बैंक मैनेजर सचिन उपाध्याय की हत्या हो गई थी। 12 अक्टूबर को सचिन की पत्नी ने पुलिस को सुसाइड की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने मौका मुआयना किया था। सचिन के परिजनों ने आत्महत्या पर शंका जताते हुए हत्या का आरोप लगाया था। इसके बाद सचिन की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने सारी पोल पट्टी खोल दी। इसके बाद पुलिस ने सचिन की पत्नी प्रियंका, ससुर कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बिजेंद्र रावत और प्रियंका के भाई के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कर बिजेंद्र के बेटे को जेल भेज दिया था। इसी बीच प्रियंका और उसके पिता बिजेंद्र रावत फरार हो गए थे। पुलिस पिछले 15 दिनों से उनकी तलाश में जुटी थी। इसी दौरान सर्विलांस की मदद से शनिवार देर रात उन्हें प्रयागराज में गिरफ्तार कर लिया गया। आगरा लाकर पुलिस ने उनसे पूछताछ शुरू कर दी है।
दरअसल, 12 अक्टूबर को थाना ताजगंज स्थित राम रघु एग्जॉटिका कॉलोनी में बैंक प्रबंधक सचिन उपाध्याय का शव उनके घर पर मिला था। पत्नी ने सचिन द्वारा सुसाइड करने की बात कही थी। इस पर पोस्टमार्टम कराया गया तो सारी कहानी बदल गयी। सचिन ने आत्महत्या नही बल्कि उसकी हत्या हुई है। पीएम रिपोर्ट के अनुसार मृतक उसके शरीर पर काफी चोट थी और गला घोटकर उसकी हत्या की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुई थी। पुलिस की जांच शुरू इसमें सामने आया कि प्रियंका का भाई कृष्णा 11 अक्टूबर की रात को करीब 25 मिनट तक बहन के घर पर ही था। पुलिस ने CCTV और लोकेशन से इसकी पुष्टि की है।
इस पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। घटना के समय मृतक की पत्नी प्रियंका मौजूद थी। पुलिस को आत्महत्या की जानकारी दी गई थी। मगर, घटना स्थल पर सुसाइड से संबंधित कोई साक्ष्य नहीं मिला। ना रस्सी मिली ना ही दरवाजा तोड़ा गया था। मुकदमा दर्ज होने के बाद से ससुर विजेंद्र रावत भी फरार चल रहे थे तो वहीं मृतक की पत्नी ने तबीयत खराब होने पर अस्पताल में भर्ती हो गई थी। मृतक की पत्नी ने अपने ससुराल पक्ष पर दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया था उसके दहेज उत्पीड़न का मुकदमा खारिज होने के बाद वो भी फरार हो गयी थी।
जानकारी के मुताबिक दोनों हाईकोर्ट से इस मामले में एंटीसिपेटरी बेल लेना चाहते थे इसीलिए प्रयागराज में छिपे हुए थे लेकिन आगरा पुलिस ने देर रात उन्हें प्रयागराज से गिरफ्तार किया और आगरा ले आई। इस मामले में प्रियंका का भाई कृष्णा पहले ही जेल जा चुका है। मामला हाई प्रोफाइल होने के चलते पुलिस भी इस मामले में फूंक फूंक कर कदम रख रही थी लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया और उनकी गिरफ्तारी के लिए धर पकड़ शुरू कर दी लेकिन दोनों ही बैल लेने के चलते फरार हो गए थे। आरोपी ससुर बिजेंद्र रावत भी फरार थे। पुलिस उन्हें तलाश रही थी। पकड़ने के लिए दबिश दी जा रही थीं। शनिवार यानी 28 अक्टूबर को ताजगंज पुलिस ने दोनों आरोपियों को प्रयागराज से अरेस्ट किया। बताया गया है कि दोनों हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे के लिए प्रयागराज पहुंचे थे। देर रात पुलिस दोनों को लेकर आगरा लेकर आई है।
प्रमोद कुशवाह की रिपोर्ट