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विश्व जल दिवसः मुगलकाल में दिल्ली से आगरा तक जलमार्ग से होता था व्यापार

नाव से आते थे व्यापारी, आगरा किले के गेट से सटकर बहती थी यमुना, अब बीच में है सड़क, हाथी गेट तक रहता था पानी।

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आगरा

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Dhirendra yadav

Mar 22, 2018

World Water Day 2018

World Water Day 2018

आगरा। आज जिस यमुना में रेत दिखाई दे रहा है, आपको जानकर हैरानी होगी कि उसी यमुना में एक वो समय था, जब पानी के जहाज चला करते थे। दिल्ली से आगरा के लिए उस समय नाव से लोग सफर करते थे। इस जलमार्ग से ही मुगलकाल में व्यापार होता था। मुगलकालीन समय में यमुना आगरा किले से सटकर बहा करती थी। यहां हाथी घाट पर नाव आकर रुकती थीं, यहां से बाहर के व्यापारी आगरा के बाजार में आते और जाते थे।

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तीन मंजिला होती थी नौकाएं
इतिहासकार राज किशोर राजे ने बताया कि दिल्ली से आगरा तक यात्रियों के लिए नावें चलती थीं, वहीं तीन मंजिला नावें भी चलती थीं, जिसमें राजशाही लोग सफर किया करते थे। इसके अलावा मालवाहक नौकाओं की संख्या भी अच्छी खासी थी। यूरोपियन पर्यटक भी इसी जलमार्ग से आगरा आते थे। उस समय में सड़क मार्ग की तरह जलमार्ग से भी यातायात का बड़ा महत्व होता था। बाहरी जगहों से यमुना नदी में नावों द्वारा माल आता जाता था। खास बात ये थी, कि यमुना से निकली नहरों के द्वारा ये माल नगर के प्रमुख स्थानों तक पहुंचाया जाता था।

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Gadhapada उसी समय की निशानी
इतिहासकार राज किशोर राजे ने बताया कि आगरा में आज जिस स्थान को Gadhapada कहा जाता है, वो उसी समय की निशानी है। माल ढोने के लिए बड़ी संख्या में गधे पाले जाते थे। गधों को पालने वाले जिस स्थान पर बहुतायत में रहते थे, उस स्थान को गधापाड़ा कहा जाने लगा। सन् 1868 ई. में जब बेलनगंग के सेठ सूरजभान के प्रयासों से गधापाड़ा में रेलवे माल गोदाम की स्थापना हुई, तो इस स्थान का नाम माल गोदाम गधापाड़ा पड़ गया।

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