27 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

वडोदरा के युवक सहित 26 लोग 90 दिन से इक्विटेरियल गिनी में फंसे

सांसद रंजनबेन भट्ट ने विदेश मंत्रालय से मांगी मदद

2 min read
Google source verification
वडोदरा के युवक सहित 26 लोग 90 दिन से इक्विटेरियल गिनी में फंसे

वडोदरा के मूल निवासी हर्षवर्धन।

वडोदरा. वडोदरा के युवक सहित 26 लोग 90 दिन से अफ्रीका के इक्विटेरियल गिनी देश में फंसे हुए हैं। स्थानीय सांसद रंजनबेन भट्ट ने सभी लोगों को मुक्त करवाने के लिए सरकार से मदद की मांग की है।
मध्य अफ्रीका के इस देश में फंसे वडोदरा के मूल निवासी युवक सहित 26 लोगों को जहाज पर नौकरी करने के समय सुरक्षा गार्ड ने पकड़ लिया था। इन लोगों का कब्जा नाइजीरिया की ओर से लिए जाने की सूचना मिलने पर परिजन चिंतित हैं।
वडोदरा के अलकापुरी क्षेत्र स्थित चीकूवाड़ी की एक सोसायटी में रहने वाला हर्षवर्धन मुकुंद शौचे की पत्नी स्नेहा के अनुसार 4 नवंबर को पति से सूचना मिली की सभी 26 लोगों का कब्जा नाइजीरिया लेने वाला है, तब से उनकी चिंता बढ़ गई है। उन्होंने सोमवार को सांसद रंजनबेन भट्ट से मुलाकात कर इस बारे में जानकारी दी।
स्नेहा के अनुसार उसके पति की कंपनी की ओर से इक्विटेरियल गिनी को जुर्माना चुका दिया गया है। उनके अनुसार फंसे हुए 26 लोगों में से कई लोग बीमार हो गए हैं। उन्होंने बताया कि पहले लगता था कि जांच पूरी होने के बाद पति घर लौटेंगे। गत अक्टूबर महीने में वीडियो कॉलिंग के जरिए पति से बात हुई थी, नए साल की शुभकामना दी थी। उस समय स्थिति खराब नहीं थी।
उन्होंने भारत सरकार से पति सहित जहाज के सभी 26 कू्र सदस्यों को मुक्त कराने और भारत लाने की व्यवस्था करने की मांग की है। उनके अनुसार अब केवल भारत सरकार और भगवान पर ही भरोसा है। उन्होंने पति को घर लौटाने के लिए भगवान से प्रार्थना की है।
हर्षवर्धन की माता मानसी व पिता मुकुंद शौचे के अनुसार अब चिंता बढ़ गई है। उनका पुत्र अगस्त के पहले सप्ताह में लौटने वाला था। अब नाइजीरिया की ओर से कब्जा लेने की सूचना मिलने पर वे चिंतातुर हो गए हैं। स्नेहा के रोने के समय उसके पांच साल के पुत्र पर्व को भी सामने जाने से रोकना पड़ता है और बहाना बनाकर दूसरे कमरे में ले जाना पड़ता है। उन्होंने मदद के लिए भारतीय विदेश मंत्रालय को पत्र लिखा है। सांसद भट्ट के अनुसार उन्होंने भारतीय विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर मदद मांगी है।