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गुजरात के 33 हजार चिकित्सक हड़ताल पर

निजी चिकित्सकों की हड़ताल से सरकारी अस्पतालों में पहुंचे मरीज  

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गुजरात के 33 हजार चिकित्सक  हड़ताल पर

गुजरात के 33 हजार चिकित्सक हड़ताल पर

अहमदाबाद. Hospital अस्पतालों में (issue of ICU on the ground floor) ग्राउंड फ्लोर पर ही आइसीयू होने के मुद्दे पर शुक्रवार को Gujarat गुजरात में निजी अस्पतालों के 33 हजारDoctor चिकित्सकों ने Strike हड़ताल कर विरोध जताया। इस हड़ताल की वजह से गुजरात के सबसे बड़े अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में आमदिनों की तुलना में अधिक मरीज भर्ती हुए हैं। हालांकि ओपीडी में ’यादा अन्तर नहीं आया देखा गया।
हड़ताल को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) की गुजरात इकाई के बैनर तले पूरे रा’य में निजी अस्पतालों के बंद का निर्णय किया गया। गुजरात इकाई के अध्यक्ष डॉ. परेश एम. मजमूदार ने कहा कि ग्राउंडफ्लोर पर ही आइसीयू होने की एवज में सात दिन का नोटिस मिलने के विरोध में अस्पतालों-क्लीनिकों में सभी सेवाएं बंद करने का निर्णय किया गया। उनका दावा है कि शुक्रवार को विरोध के तहत रा’यभर में 33000 से ’यादा चिकित्सक हड़ताल में जुड़े। सभी अस्पतालों में ओपीडी से लेकर इमरजेंसी सेवाएं बंद करने का दावा किया गया।
हड़ताल के कारण सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या में कुछ हद तक वृद्धि हुई है। अहमदाबाद शहर में ही लगभग तीन हजार अस्पतालों के 11000 से अधिक चिकित्सक हड़ताल में जुड़े हैं। इसी तरह से वडोदरा, सूरत, राजकोट, जामनगर, गांधीनगर, भावनगर समेत बड़े एवं छोटे शहरों में भी निजी अस्पताल बंद रहे।

मनपा संचालित अस्पतालों के चिकित्सकों की छुट्टियां की गईं रद्द
अहमदाबाद महानगरपालिका ने निजी चिकित्सकों की हड़ताल को ध्यान में रखकर शहर के सरदारवल्लभाई पटेल (एसवीपी) अस्पताल, वीएस अस्पताल, एल.जी. अस्पताल और शारदाबेन अस्पताल के चिकित्सकों की छुट्टिया भी रद्द कर दी थीं।

सिविल अस्पताल में 10 फीसदी अधिक भर्ती हुए मरीज

अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में शुक्रवार को आम दिनों की तुलना में लगभग 10 फीसदी अधिक मरीज भर्ती हुए हैं। शाम तक अस्पताल में 393 मरीजों को भर्ती किया गया। आम दिनों में यह संख्या औसतन 350 के आसपास होती है। हालांकि ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या में ’यादा वृद्धि नहीं हुई है।

डॉ. राकेश जोशी, चिकित्सा अधीक्षक

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नहीं बनी बात तो आगामी दिनों विरोध का बढ़ेगा दायरा

सभी अस्पतालों में आइसीयू का ग्राउंड फ्लोर पर होना असंभव है। यदि ऐसा होता भी है तो रा’य में आइसीयू की संख्या बहुत कम रह जाएगी, जिससे मरीजों को काफी पेरशानी का सामना करना पड़ेगा। साथ ही ग्राउंड फ्लोर पर आइसीयू होने पर संक्रमण दर भी बढ़ सकती है। इस मुद्दे का सकारात्मक तौर पर निपटारा नहीं हुआ तो विरोध का दायरा बढ़ाया जाएगा। आगामी दिनों में आइएमए के पदाधिकारियों के साथ बैठक आयोजित कर रणनीति बनाई जाएगी।

डॉ. परेश मजमूदार, अध्यक्ष आइएमए, गुजरात शाखा