
जल अभियान के बाद अब हरियाली क्रांति के लिए पौधारोपण अभियान
गांधीनगर. जल क्रांति के बाद राज्य सरकार अब हरियाली क्रांति के लिए पौधारोपण अभियान आरंभ करेगी। मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने शुक्रवार को 68वें वन महोत्सव का शुभारंभ करते हुए यह बात कही।
गुरुपूर्णिमा के पावन अवसर पर इस महोत्सव के तहत कच्छ में रक्षक वन के लोकार्पण समारोह के दौरान उन्होंने कहा कि अगले महीने राज्यभर में नदी और तालाबों के किनारे पौधारोपण अभियान से गुजरात हरियाली क्रांति की ओर आगे बढ़ेगा।
राज्य में तालाब, चैकडेम गहरा करने के सुजलाम-सुफलाम जल अभियान के परिणाम से 11 हजार लाख घन फुट से ज्यादा बरसाती जल के संग्रहण की क्षमता विकसित की है। अब, नदी-तालाबों के किनारे पौधारोपण अभियान से गुजरात हरा-भरा बनेगा।
उन्होंने कहा कि अब तक निर्मित सांस्कृतिक वनों में सबसे विशाल 9.4 हेक्टेयर में फैला यह रक्षक वन 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान नष्ट भुज की हवाई पट्टी माधाापर की महिलाओं ने रातोंरात पुनर्जीवित कर दी थी।
रुपाणी ने कहा कि वन के साथ जन को जोडक़र वन महोत्सव को जन महोत्सव बनाया है। राज्य में जंगल के अलावा वृच्छादित 4.06 फीसदी इलाके के साथ आगे है। देश में यह इलाका 2.87 फीसदी है। राज्य में 18 सांस्कृतिक वन से वनविभाग गत वर्ष तक 34.35 करोड़ पौधे विकसित किए हैं। गत 13 वर्षों में वृक्षों की संख्या में 37 फीसदी की बढोत्तरी हुई है। पिछले दो वर्षों में वृच्छादित इलाके में 9700 हेक्टेयर की वृद्धि हुई है।
वनमंत्री गणपत वसावा ने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री व वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2004 में सांस्कृतिक वन की शुरुआत की थी। वर्ष 2004 में वन महोत्सव आरंभ किया गया था। इसके तहत वर्ष 2016 तक सांस्कृतिक वन निर्मित किए गए। इनमें पुनित वन, मांगल्य वन, हरिहर वन, भक्ति वन, श्यामल वन, पावक वन, विरासत वन, गोङ्क्षवदगुरु स्मृति वन, नागेश वन, जानकी वन, तीर्थंकर वन, शक्ति वन, महीसागर वन, आम्र वन, एकता वन, शहीद वन शामिल हैं। 29 जुलाई से राज्य के सभी 33 जिलों की सभी तहसीलों, नगरपालिका, महानगरपालिका व 4500 गांवों में जनभागीदारी से वन महोत्सव मनाया जाएगा।
Published on:
28 Jul 2018 06:30 pm
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