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चौराहों पर भटक रहे बचपन तक पहुंचा प्रशासन, भीख मांगते मिले 44 बच्चों को छुड़ाया

तीन दिन चलने वाले इस अभियान के पहले ही दिन शहर के चौराहों पर भीख मांगते मिले 44 बच्चों को रेस्क्यू कर उन्हें संरक्षण और बेहतर भविष्य देने की दिशा में पहल शुरू की है।

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Ahmedabad news

लाए गए बच्चों के साथ साथ मनपा की टीम व अन्य।

अहमदाबाद शहर के ट्रैफिक सिग्नलों पर गाड़ियों के बीच दौड़ते नन्हे कदम, भीख के लिए लोगों के आगे फैलाते छोटे-छोटे हाथ और चौराहों पर भटक रहे बचपन को सही ठिकाना दिलाने को सोमवार से मनपा, पुलिस और समाज सुरक्षा विभाग ने संयुक्त अभियान छेड़ा है।

तीन दिन चलने वाले इस अभियान के पहले ही दिन शहर के चौराहों पर भीख मांगते मिले 44 बच्चों को रेस्क्यू कर उन्हें संरक्षण और बेहतर भविष्य देने की दिशा में पहल शुरू की है।अहमदाबाद महानगरपालिका (मनपा), शहर पुलिस की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) और गुजरात समाज सुरक्षा विभाग ने सोमवार को शहर के उत्तर-पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम जोन में विशेष एंटी बैगिंग ड्राइव चलाई।

इस दौरान शहर के 41 हॉट स्पॉट ट्रैफिक सिग्नल, प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर गहन अभियान चलाया गया। इस दौरान भीख मांग रहे 44 बच्चों को रेस्क्यू कर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष पेश किया गया।

चार बच्चों को बाल संरक्षण गृह भेजा, 40 परिजन को सौंपे

समिति के निर्देश पर चार बच्चों को बाल संरक्षण गृह भेजा गया है, जबकि 40 बच्चों को उनके माता-पिता को सौंपा गया है। उन्हें हिदायत दी गई है कि भविष्य में उनसे भीख नहीं मंगवाई जाएगी।

15 पुरुष व 5 महिलाओं को भीख से मुक्ति दिलाने का प्रयास

अभियान के दौरान शहर में भीख मांगते मिले 15 पुरुषों और पांच महिलाओं का भी रेस्क्यू किया गया है। उन्हें अदालत में पेश करने के बाद 15 पुरुषों को ओढव और महिलाओं को डभोड़ा स्थित भिक्षुक गृह भेजा गया है।

इस अभियान का उद्देश्य केवल सड़कों से भिक्षावृत्ति हटाना नहीं, बल्कि उन बच्चों तक पहुंचना भी है, जिनका बचपन शिक्षा और खेल के मैदानों के बजाय ट्रैफिक सिग्नलों और चौराहों पर बीत रहा है।

ज्यादातर शहर के आसपास के रहने वाले

शहर महिला पुलिस की एसीपी हिमाला जोशी ने बताया कि तीन दिवसीय अभियान के पहले दिन 44 बच्चों को मुक्त कराया है। इसमें से ज्यादातर शहर के आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के रहने वाले हैं। कुछ राजस्थान व अन्य राज्यों के मूलनिवासी हैं,लेकिन मजदूरी के सिलसिले में यहां लंबे समय से रह रहे हैं। प्राथमिक जांच में ज्यादातर बच्चे उनके परिजनों के साथ मिले हैं। परिजन होने का दावा करने वालों की भी जांच की जा रही है।