एशिया के सबसे बड़े अहमदाबाद सिविल अस्पताल में इमरजेंसी में आने वाले मरीज की गंभीरता का आंकलन उसके हाथ में बंधी बेल्ट के रंग से लगाया जा सकेगा। अस्पताल प्रशासन ने मरीज की स्थिति के आधार उसे उपचार मुहैया कराने के उद्देश्य से यह नई पहल की है। ट्रोमा सेंटर में आने वाले मरीजों को तीन रंग लाल, पीला और हरे रंग में से कोई एक रंग की बेल्ट बांधी जाएगी। प्रसूता महिला को नीले, नवजात पुत्र को भी नीले तथा पुत्री को गुलाबी रंग की बेल्ट बांधी जाएगी। नए वर्ष 2024 की शुरुआत से आपातकालीन उपचारवालों के लिए यह नया बेल्ट कलर कोड महत्वपूर्ण साबित होगा। अस्पताल के ट्रोमा सेंटर में प्रतिदिन लगभग 500 मरीज आते हैं। ऐसे में यह पता करना भी जरूरी है कि कौन से मरीज को बहुत जल्दी और असरकारक उपचार की जरूरत है। ट्रोमा सेंटर में कार्यरत मेडिसिन विभाग के चिकित्सक मरीज की जांच कर उसके रोग की गंभीरता को देखते हुए संबंधित रंग की बेल्ट बांधेंगे।
बेल्ट के कलर से होगी स्थिति को भांपने में आसानी
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने बताया कि बेल्ट प्रणाली के कारण अन्य विभाग के चिकित्सक भी मरीज की गंभीरता को भांप सकेंगे। जरूरत वाले मरीज का तत्काल उपचार शुरू किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि मरीज का एक्स-रे, सोनोग्राफी या सीटी स्कैन जैसी जांच भी उसी आधार पर की जा सकेगी। बेल्ट के रंग वाली व्यवस्था से अस्पताल के सभी चिकित्सा कर्मियों को अवगत करवा दिया गया है।बेल्ट सिस्टम से आपात स्थिति वाले मरीजों को तत्काल उपचार दिया जा सकेगा।
मरीज की किस स्थिति में कौनसी बेल्ट
डॉ. जोशी के अनुसार सांस लेने में दिक्कत, बहुत ज्यादा अनियमित रक्तचाप, हाइपर वेंटिलेशन, पल्स रेट की अनियमितता जैसी जान के जोखिम वाली स्थिति में लाल रंग की बेल्ट बांधी जाएगी। साथ ही जिन मरीजों को तत्काल उपचार की आवश्यकता है लेकिन उन्हें जान का ज्यादा जोखिम नहीं है, तो उन्हें पीले रंग की बेल्ट बांधी जाएगी। ग्रीन बेल्ट का मतलब उन मरीजों से है जो तत्काल इलाज के लिए आते हैं, लेकिन उनकी हालत सामान्य होती है। ऐसे मरीजों को सांस लेने में कोई दिक्कत नहीं होती है और रक्तचाप भी सामान्य होता है। ऐसे मरीजों को भर्ती करने की जरूरत बहुत ज्यादा नहीं होती। गर्भवती महिला व नवजात पुत्र को नीली तथा नवजात पुत्री को गुलाबी रंग का बेल्ट बांधी जाएगी।