
Ahmedabad: शहर के सिविल अस्पताल में हेमोफीलिया जैसी गंभीर और दुर्लभ बीमारी से पीड़ित 669 मरीजों को जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध कराया गया है। स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में मात्र एक वर्ष के दौरान इन मरीजों को 17 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले इंजेक्शन नि:शुल्क दिए गए।
सरकार ने यह कदम गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को महंगे इलाज के बोझ से राहत देने के लिए उठाया है। हेमोफीलिया रोगियों के लिए आवश्यक क्लॉटिंग फैक्टर इंजेक्शन अत्यंत महंगे होते हैं, जिन्हें सामान्य परिवार खरीदने में सक्षम नहीं होते। इस कठिनाई को ध्यान में रखकर सरकार ने गुजरात मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च सोसाइटी (जीएमईआरएससीएल) के माध्यम से इन इंजेक्शनों की थोक खरीद की है।
रक्तस्राव को रोकने के लिए इंजेक्शन जरूरी
सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने बताया कि इस तरह के इंजेक्शन रक्तस्राव रोकने और थक्का बनाने के लिए जरूरी होते हैं। वर्षभर में मरीजों को कुल 2,095 इंजेक्शन फैक्टर-8 के, 1,100 इंजेक्शन फैक्टर-9 के, 397 इंजेक्शन फैक्टर-7 के, 103 इंजेक्शन फैक्टर-9 इनहिबिटर के, 278 इंजेक्शन फैक्टर-8 इनहिबिटर के, 626 इंजेक्शन फीबा के और 243 इंजेक्शन एमिसिजुमैब के नि:शुल्क दिए गए। उन्होंने कहा कि जिस फैक्टर की मरीज के शरीर में कमी होती है, वही प्रोटीन सीधे इंजेक्शन के रूप में दिया जाता है। यह उपचार रक्तस्राव रोकने और मरीज की जान बचाने में रामबाण साबित होता है।
डॉ. जोशी ने आगे कहा कि राज्य सरकार के आर्थिक सहयोग और संवेदनशील दृष्टिकोण के कारण ही सिविल अस्पताल में सभी मरीजों को यह महंगी चिकित्सा सुविधा बिना किसी खर्च के उपलब्ध हो सकी। वर्ष 2025-26 में दिए गए इंजेक्शनों से 669 मरीजों का जीवन बचाया गया। राज्य सरकार की यह भगीरथ पहल मरीजों के प्रति प्रतिबद्धता और हेमोफीलिया जैसे दुर्लभ रोग के खिलाफ लड़ाई में नागरिकों को मदद मिल रही है।
हेमोफीलिया क्या है
हेमोफीलिया एक जन्मजात बीमारी है। इसमें रक्त जमाने वाले क्लॉटिंग फैक्टर-7, फैक्टर-8 और फैक्टर-9 की कमी होती है। मामूली चोट या आघात से भी लंबे समय तक रक्तस्राव होता है। रोगी के जीवन को बचाने के लिए तुरंत क्लॉटिंग फैक्टर इंजेक्शन देना अनिवार्य होता है। यह बीमारी दुर्लभ है और इसके उपचार में महंगे इंजेक्शन की आवश्यकता होती है।