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Ahmedabad Civil Hospital: सिविल अस्पताल के चिकित्सकों का कजाकिस्तान में भी बजा डंका

तीन ब्लैडर एस्ट्रोफी समेत पांच जटिल ऑपरेशन किए एक ऑपरेशन में लगता है लगभग 10 घंटे का समय

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Ahmedabad Civil Hospital: सिविल अस्पताल के चिकित्सकों का कजाकिस्तान में भी बजा डंका

Ahmedabad Civil Hospital: सिविल अस्पताल के चिकित्सकों का कजाकिस्तान में भी बजा डंका

अहमदाबाद. एशिया के सबसे बड़े सिविल अस्पताल Civil Hospital के चिकित्सकों ने कजाकिस्तान Kazakhstan में जाकर भी डंका बजा दिया। गत दिनों कजाकिस्तान यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर Kazakhstan University Medical Center की ओर से सिविल अस्पताल के चिकित्सकों से ब्लैडर एस्ट्रोफी bladder astrophy संबंधित ऑपरेशन में सहयोग मांगा था। सिविल अस्पताल की टीम ने वहां जाकर तीन बच्चों के ब्लैडर एस्ट्रोफी समेत पांच जटिल ऑपरेशन किए।
कजाकिस्तान यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के आमंत्रण पर सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक एवं पीडियाट्रिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश जोशी Dr. Rakesh Joshi, ऑर्थोपेडिक एवं स्पाइन सर्जन डॉ. पियुष मित्तल Piyush Mittal तथा पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जयश्री रामजी Dr. Jayshri Ramji कजाकिस्तान के दौरे पहुंचे। जहां 16 नवम्बर से 20 नवम्बर इस टीम ने तीन बच्चों के ब्लैडर एस्ट्रोफी संबंधित ऑपरेशन किए। इन तीनों बच्चों की आयु चार माह, 10 माह और 15 माह है। सिविल अस्पताल की इस टीम ने कजाकिस्तान के चिकित्सकों को ब्लैडर स्ट्रोफी के ऑपरेशन का प्रशिक्षण भी दिया।

बाल सर्जरी विभाग के साथ-साथ ऑर्थोपेडिक की भी भूमिका

इस टीम में स्पाइन एवं ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. पियूष मित्तल भी कजाकिस्तान दौरे पर गए थे। उनके अनुसार ऑपरेशन में बाल सर्जरी विभाग के अलावा ऑथोपेडिक विभाग की भी भूमिका होती है। ऑपरेशन के दौरान खुली जगह को भरने के लिए हड्डी को काटने और जोडऩे की भी आवश्यकता होती है।

देश विदेश के बच्चों का किया गया है ब्लैडर एस्ट्रोफी ऑपरेशन

सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी के अनुसार बच्चों में जन्म से शारीरिक कमियों के कारण होने वाले ऑपरेशन में ब्लैडर स्ट्रोफी को सबसे जटिल माना जाता है। मूत्राशय की जगह खुली होने के कारण यूरिन का रिसाव होता है जिसे बंद करने के लिए जटिल ऑपरेशन की जरूरत होती है। सिविल अस्पताल में न सिर्फ गुजरात और देश के अन्य राज्यों से बल्कि श्रीलंका, बंाग्लादेश जैसे देशों से भी मरीजों के ऑपरेशन किए। अस्पताल में अब तक तक यहां 206 ऐसे जटिल ऑपरेशन किए गए हैं।

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