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अहमदाबाद में 10 वर्षों में सबसे अधिक तापमान, 44.2 डिग्री

आज भी गर्मी का ज्यादा प्रकोप संभव

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अहमदाबाद में 10 वर्षों में सबसे अधिक तापमान, 44.2 डिग्री

अहमदाबाद में 10 वर्षों में सबसे अधिक तापमान, 44.2 डिग्री

अहमदाबाद. राज्य में गर्मी का प्रकोप बुधवार को भी बरकरार रहा। अहमदाबाद शहर में न सिर्फ मौसम की सबसे अधिक गर्मी रही बल्कि अप्रेल माह में बीते 10 वर्षों में सबसे अधिक तापमान रहा। बुधवार को शहर का अधिकतम तापमान 44.2 डिग्री तक दर्ज किया गया।
राज्य में बुधवार को सबसे अधिक 44.3 डिग्री सेल्सियस तापमान सुरेन्द्रनगर का रहा। जबकि 44.2 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ दूसरा सबसे गर्म शहर अहमदाबाद रहा। अप्रेल माह में पिछले दस वर्षों में इतना तापमान अब तक कभी नहीं रहा। इससे पहले गत आठ अप्रेल को शहर में अधिकतम तापमान 44 डिग्री तक पहुंचा था। वर्ष 2019 में 5 अप्रेल, 29 और 30 अप्रेल को 43.7 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। अप्रेल माह में ऑल टाइम रिकॉर्ड की बात करें तो 27 अप्रेल 1958 में 46.2 डिग्री सेल्सियस था।
अहमदाबाद शहर में बुधवार सुबह 11 बजे से ही गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए। दोपहर को झुलसाने वाली गर्मी और लू के थपेड़ों के कारण लोग परेशान दिखे। उस दौरान सडक़ों और बाजारों में भी आवाजाही कम रही। अमरेली में 43.5, भुज में 43.2, राजधानी गांधीनगर में 43 और राजकोट का अधिकतम तापमान 42.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
मौसम विभाग के अनुसार गुरुवार को भी कच्छ और सूरत जिलों के कुछ भाग गर्मी से प्रभावित रहेंगे।

अहमदाबाद में साबरमती तट को और आकर्षण बनाने पर जोर

अगामी बारिश के मौसम में रोपे जाएंगे और तीन लाख पौधे

अहमदाबाद. साबरमती रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट के अन्तर्गत शहर में नदी के तट को और आकर्षण बनाने पर जोर दिया जाएगा। रिवरफ्रंट को हराभरा बनाने के लिए आगामी बारिश के दौरान तीन लाख पौधे रोपे जाएंगे।
रिवरफ्रंट कॉर्पोरेशन के चेयरमैन केशव वर्मा के अनुसार रिवरफ्रंट पर लोग अधिक से अधिक संख्या में कसरत और टहल सके इस उद्देश्य से व्यवस्था की जाएगी। इसमें ऑपन जिम्नेशियम और योगा क्लास भी शुरू की जाएंगी। तट को आकर्षण बनाने के लिए विविध गतिविधियों के लिए आर्मी और एनसीसी का सहयोग लिया जाएगा। उनके अनुसार रिवरफ्रंट पर आगामी बारिश के दौरान के मौसम में नए तीन लाख पौधे रोपने की योजना है। साथ ही दो नए पार्क भी तैयार होंगे।साबरमती तट को विश्वस्तरीय बनाना चाहते हैं। उनके अनुसार नदी के पानी में पहले की तुलना में ऑक्सीजन की मात्रा में भी वृद्धि हुई है।