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Ahmedabad: दोहरी हत्या के मुख्य आरोपी को डेढ़ दशक बाद राजस्थान से पकड़ा

जोन-2 एलसीबी की टीम ने राजस्थान, मध्यप्रदेश में वेश बदलकर की कार्रवाई

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Ahmedabad zone 2 DCP LCB

Ahmedabad. शहर के साबरमती थाना इलाके में प्रबोध रावल ब्रिज के पास 15 साल पहले 2009 में फायरिंग, डंडों से वार कर की गई दो प्रजापति भाईयों की हत्या (Double murder) के मामले में वांछित मुख्य आरोपी को डेढ़ दशक बाद पकड़ने में सफलता मिली है।

जोन-2 के पुलिस उपायुक्त की लोकल क्राइम ब्रांच (एलसीबी) ने कड़ी मशक्कत के बाद राजस्थान के धौलपुर जिले और मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के गांवों में वेश बदलकर कई दिनों तक नजर रखने के बाद आरोपियों को चिन्हित कर पकड़ा है।

पकड़े गए आरोपियों में मुख्य आरोपी मुन्ना सिंह कुशवाह (48) और सीताराम कुशवाह (56) शामिल हैं। मुन्ना सिंह राजस्थान के धौलपुर जिले की बाडी तहसील के बिजोली गांव का रहने वाला है। जबकि सीताराम मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के खेडा मेवडा गांव का रहने वाला है। यह दोनों ही पुलिस के डर से अपने गांव छोड़ अन्य गांवों में रह रहे थे। खेत में मजदूरी का काम करते थे।

चना जोर गरम बेचने की जगह को लेकर हुई थी कहासुनी

जोन-2 एलसीबी के पीएसआई के डी पटेल ने बताया कि एयरपोर्ट के पास चना जोर गरम बेचने के मुद्दे पर आरोपी और मृतक बंधुओं के बीच कहासुनी हुई थी। राजस्थान के धौलपुर जिले के बिजोली गांव निवासी दो सगे भाई मुकेश प्रजापति, श्रीकांत प्रजापति की उन्हीं के गांव में रहने वाले मुन्ना सिंह के बीच एयरपोर्ट पर खड़े रहकर चना जोर गरम बेचने की जगह को लेकर कहासुनी हुई थी। इस पर मुन्ना सिंह ने सीताराम और अन्य 12 लोगों की गैंग बनाई। 22 नवंबर 2009 को ये सभी जब रात के समय चना जोर गरम बेचकर वापस घर लौट रहे थे। उसी समय प्रबोध रावल ब्रिज के पास आरोपियों ने पहुंचकर डंडों से दोनों भाईयों पर वार किए। मुन्ना सिंह ने फायरिंग की थी। इसके बाद दोनों फरार हो गए थेे। इस मामले में पहले छह आरोपी पकड़े जा चुके हैं। फायरिंग करने वाला मुख्य आरोपी फरार था।

वेश बदलकर बेचा दूध और फल

एलसीबी सूत्रों के तहत शातिर आरोपी पुलिस से बचने को मोबाइल फोन नहीं रखते थे। इनके गांव के पास होने की सूचना पर पुलिस ने इन्हें चिन्हित करने को ये जिन गांव में रहते थे। उसके आसपास वेश बदलकर कुछ दिनों तक फल बेचे। दूध भी बेचा। ट्रैक्टर भी चलाया। इतना ही नहीं राजस्थान, मध्यप्रदेश के लोगों की तरह सफेद गमछा भी बांधा। 15 साल में आरोपियों का चेहरा काफी बदल गया था। ऐसे में उनकी पहचान सुनिश्चित करने के बाद पहले मुन्ना सिंह को पकड़ा फिर सीताराम को हिरासत में लिया।