
MICA Professor Study: कोरोना को काबू करने में पूरी तरह से लॉकडाउन रहा ज्यादा कारगर
अहमदाबाद. कोरोना महामारी को काबू में करने के लिए पूरी तरह से लागू किया गया लॉकडाउन काफी कारगर रहा। भारत को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिला। जबकि मेडिकल के क्षेत्र में और आर्थिक रूप से सबसे विकसित अमरीका, ब्रिटेन, रूस, इटली, स्पेन और जर्मनी सरीखे देशों में पूरी तरह से लॉकडाउन करने में गंभीरता न दिखाने की भूल उन्हें भारी पड़ी। वहां कोरोना के मरीजों की संख्या में काफी वृद्धि देखी गई।
यह तथ्य माइका की प्रोफेसर शैफाली गुप्ता की ओर से किए गए कोरोना की रोकथाम के लिए अपनाए गए गैर औषधीय रोकथाम और जागरुकता कदमों के अंतरराष्ट्रीय डाटा अध्ययन में सामने आए हैं। इस अध्ययन में अमरीका के कस्टमर इंगेजमेंट एक्सपर्ट वी कुमार, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया रिवरसाइड के मार्केटिंग प्रोफेसर आशीष सूद, मेडिकल कॉलेज ऑफ जॉर्जिया के एमडी स्टूडेंट नितीश सूद भी शामिल थे। इसे अमेरिकन मार्केटिंग एसोसिएशन जर्नल में प्रकाशित किया गया है।
अध्ययन में सामने आया कि लोगों के घरों से निकलने पर पाबंदी, लोगों की आवाजाही यात्रा पर रोक, अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर रोक, स्कूल-कॉलेज को बंद रखने, गैर जरूरी व्यापारिक प्रतिष्ठानों को बंद की वजह से भारत में अन्य देशों के मुकाबले कोरोना संक्रमित मरीजों का प्रतिशत और उससे मौत की दर काफी कम रही। समान परिस्थिति और भयावहता के आंकलन वाले ब्राजील देश की तुलना में भारत की बेहतर स्थिति का भी मूल कारण पूरी तरह से समय पर और सख्त लॉकडाउन ही रहा।
अध्ययनकर्ताओं का दावा है कि इस अध्ययन के जरिए नीति निर्माताओं को काफी मदद मिलेगी। अध्ययन में जनवरी से जुलाई 2020 के 70 देशों के डाटा का अध्ययन किया गया है।
ब्राजील और भारत की तुलनात्मक स्थिति से पता चला कि भारत की ओर से कोरोना की रोकथाम के लिए कडाई से लोगों को घरों में रखने, सख्त लॉकडाउन, यात्रा पर रोक और टेस्टिंग के चलते तथा लोगों को जागरुक करने के चलते फायदा हुआ। जबकि ब्राजील में भारत की तुलना में स्वास्थ्य पर प्रतिव्यक्ति खर्च, हॉस्पिटल बेड और फिजीशियन की संख्या ज्यादा होने के चलते ब्राजील ने सख्त लॉकडाउन की पालना पर ज्यादा ध्यान केन्द्रित नहीं किया। इसके चलते जुलाई मध्य में भारत की तुलना में ब्राजील में प्रति मिलियन ज्यादा केस मिले। ये संख्या ब्राजील में प्रति मिलियन 190 से ज्यादा केस प्रति सप्ताह थी जबकि भारत में यह संख्या 25 केस प्रति मिलियन प्रति वीक रही।
Published on:
30 Oct 2020 10:39 pm
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