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Ahmedabad News : ट्रांसजेंडर चिराग को मिली नई पहचान, अब चार्मी बनकर जीएंगे स्वाभिमानपूर्वक जीवन

समाज में व्याप्त सकारात्मक परिवर्तन का प्रवाह राजकोट में प्रथम ट्रांसजेंडर को मिला प्रशासन का पहचान पत्र नए कानून के तहत अब वे खुद को ट्रांसजेंडर के रूप में पहचान दे सकेंगे खामीयुक्त संतानों को दुत्कारने के बजाय परिवार अपनत्व व प्रोत्साहन देना चाहिए : चिराग का पिता
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अहमदाबाद

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Binod Pandey

•

Updated: 19 Jul 2021, 9:04 AM IST

Ahmedabad News : ट्रांसजेंडर चिराग को मिली नई पहचान, अब चार्मी बनकर जीएंगे स्वाभिमानपूर्वक जीवन

Ahmedabad News : ट्रांसजेंडर चिराग को मिली नई पहचान, अब चार्मी बनकर जीएंगे स्वाभिमानपूर्वक जीवन

रोहित सांगाणी/बिनोद पाण्डेय

राजकोट. ट्रेनों और भीड-भाड़ वाली जगहों पर लोगों के सिर पर हाथ रखकर रुपए मांगते, ताली बताते लोगों को देखकर आम आदमी की भावना एकदम से अलग ही होती है। लोग भले उनसे आशीष लें, लेकिन उनके मन में उस ताली बजाने वाले लोगों के प्रति हमेशा से हिकारत वाली भावना ही प्रबल होते रहती है। केन्द्र सरकार की योजना अब ऐसे लोगों के लिए संबंल बन गई है, ऐसे लोग अपनी पहचान ट्रांसजेंडर के रूप में देकर हक के साथ सरकार की योजनाओं में लाभ के भागीदार होंगे। राजकोट में राज्य के ऐसे पहले व्यक्ति को जिला प्रशासन ने प्रमाण पत्र देकर इस योजना की शुरुआत कर दी गई है। राजकोट के कलक्टर अरुण महेश बाबू ने चिराग ऊर्फ चार्मी को ट्रांसजेंडर का प्रमाण पत्र देकर उसे उसकी पहचान दी, तो समाज में स्वाभिमान से जीने का हक भी प्रदान कर दिया।


प्राचीन काल में ट्रांसजेंडर को भी मिलता था सम्मान
महाभारतकालीन युग में भिष्म पितामह का मारने वाले शिखंडी का नाम आज आदरपूर्वक लिया जाता है। इसी तरह अज्ञातवास के दौरान धनुर्धर अर्जुन (बृहन्लला) का चरित्र भी सभी जानते हैं। समय के प्रवाह में परिवर्तनशील समाज के अंदर ट्रांसजेंडर के प्रति लोगों के मन में तिरस्कारजनक भाव पैदा होने लगा। परिवार और समाज के इस अपमान के कारण ऐसे लोगों में समाज के प्रति नकारात्मक भाव का जन्म होता चला गया। खासकर ट्रांसजेंडर के परिजनों की मनोदशा तो और भी हृदयविदारक हो गई। अब समाज के इस मनोभाव में सकारात्मक परिवर्तन की हवा बहने लगी है। इस कड़ी में अब नया अध्याय जुड़ गया है।

परिवार में प्रोत्साहन जरूरी
राजकोट के कलक्टर अरुण महेश बाबू ने चिराग ऊर्फ चार्मी को ट्रांसजेंडर का प्रमाण पत्र देकर उसे मानसिक स्तर पर भरपूर संतुष्टि प्रदान किया है। कलक्टर ने कहा कि समाज के अन्य लोगो की तरह ही ट्रांसजेंडर चिराग को भी सम्मानपूर्वक जीवन जीने का हक है। कलक्टर ने चिराग को हिम्मत देते हुए कहा कि सरकार की योजना से जो भी मदद दी जा सकती है, जरूर प्रदान की जाएगी।


दोनों संतान में कोई भेदभाव नहीं : पिता
इस अवसर पर चिराग के पिता ने कलक्टर और सरकार के प्रति अहसान जताते हुए कहा कि उन्हें उनके दो संतानों पर गर्व है। छोटा बेटा ट्रांसजेंडर होने के बावजूद मेरे दोनों संतान एक समान है। हमारे परिवार में दोनों को लेकर कोई भेदभाव नहीं करता है। समाज के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करते हुए चिराग के पिता कहते हैं कि संतान में यदि कोई कमी या खामी हो तो हमें इसे स्वीकार करने की जरूरत है। यह एक प्राकृतिक कमी है, इसे तिरस्कार की नहीं, अपितु प्रोत्साहन की जरूरत होती है।

फैशन डिजाइनर बनने की चाहत

चिराग जब 12 वर्ष का था, तब उसे ख्याल आया कि उसके शरी में स्त्री के रूप में मानसिक और शारीरिक बदलाव आने लगे हैं। पिता ने एक वर्ष तक चिराग का इलाज कराया। लेकिन, डॉक्टरों ने पिता को बताया कि उसकी संतान चिराग ट्रांसजेंडर है। ऐसी विकट स्थिति में चिराग के परिवार के सदस्यों ने तिरस्कार के बजाय प्रोत्साहन देना शुरू किया और चिराग को हर संभव हिम्मत बढ़ाने का काम किया। कक्षा 11वीं तक पढ़ाई करने वाला चिराग अब 20 वर्ष का हो चुका है। उसकी इच्छा उच्च शिक्षा के साथ ही फैशन डिजाइन सिखने की है। चिराग के मित्र भी हैं जो उसके साथ घूमते हैं और रेस्टोरेंट में जाकर सहजतापूर्वक खाना खाते हैं।

मुख्यधारा में लाना उद्देश्य
अब तक हिकारत और अपमान की जिंदगी जीने वाले ट्रांसजेंडर को समाज की मुख्य धारा में लाने के लिए केन्द्र और राज्य सरकार की ओर से उन्हें पहचान देने की योजना शुरू की गई है। समाज में ट्रांसजेंडरों की भी अपनी पहचान हो, और वे इसके जरिए मुख्यधार में सम्मिलत हो पाए।

आई कार्ड इश्यू किया जाएगा
केन्द्र सरकार के नए कानून के तहत ट्रांसजेंडर को आई कार्ड इश्यू किया जाने लगा है। इसके जरिए वे अपनी पहचान बता सकेंगे। इसके साथ उन्हें गरीमामय मानव जीवन जीने का पूरा अधिकार होगा। आईडी कार्ड के लिए चिकित्सकीय प्रमाण पत्र देना जरूरी होगा। सरकार उन्हें एक हजार रुपए की पेंशन राशि भी मुहैया कराएगी।
मेहुल गोस्वामी, समाज सुरक्षा अधिकारी, राजकोट