3 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Ahmedabad: वणझर गांव के लोगों को 5 दशक बाद मिलेंगे घर के कागजात

-वेजलपुर विधायक अमित ठाकर की मेहनत लाई रंग, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह 28 दिसंबर को सौंपेगे घर की सनद

2 min read
Google source verification
Nava Vanjhar Village

Ahmedabad. शहर के वेजलपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नवा वणझर गांव में बसने वाले लोगों की पांच दशक पुरानी समस्या हल होने वाली है।

रविवार को स्थानीय सांसद एवं केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह इस गांव के लोगों को उनके घर-जमीन के मालिकाना हक के सरकारी कागजात (सनद) सौंपेंगे। इसके लिए नवा वणझर गांव के भवानी चौक में एक सार्वजनिक कार्यक्रम होगा।

वेजलपुर के विधायक अमित ठाकर की मेहनत और लगातार प्रयत्नों के चलते यह मुद्दा हल होने जा रहा है। ठाकर ने बताया कि उन्हें जब 2022 में वेजलपुर सीट से भाजपा का टिकट मिला तो वह चुनाव प्रचार के लिए नवा वणझर गांव में गए। तब वहां के लोगों ने अपनी इस जटिल समस्या के बारे में बताया। तब से वह लगातार इस मुद्दे को हल करने के लिए प्रयासरत थे। इसमें मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह का मार्गदर्शन और मदद दोनों ही मिली, जिसके चलते इस गांव के 239 मकान में रहने वाले लोगों की पांच दशक पुरानी समस्या हल होने जा रही है। इसमें से 180 लोगों को 28 दिसंबर को सनद मिलेगी।

1973 में आई बाढ़ में बह गए थे घर

विधायक ठाकर ने बताया कि अहमदाबाद में साबरमती नदी के किनारे बसा जूना वणझर गांव वर्ष 1973 में साबरमती नदी में आई बाढ़ में बह गया था। गांव के घर और जमीन सब बर्बाद हो गई थी ऐसे में उस समय राज्य सरकार ने पास में ही गांव के लोगों को घर बनाने के लिए जमीन आवंटित की। वहां पर नवा वणझर गांव बसा। लोगों ने मकान बनाए। किन्हीं कारणों से नवा वणझर गांव में बाढ़ प्रभावितों को आवंटित जमीन और मकान के जो मालिकाना हक के प्रमाण-पत्र (सनद) मिलने चाहिए थे, वह नहीं मिल पाए। उन्होंने स्थानीय विधायक के नाते पहले कलक्टर के समक्ष फिर मनपा आयुक्त के समक्ष इस मुद्दे को लगातार उठाया। अब गांव के लोगों को मालिकाना हक के प्रमाण-पत्र मिलने जा रहे हैं।

मकान पर नहीं मिलता था लोन, बेच भी नहीं सकते

नवा वणझर गांव निवासी विष्णु पटेल कहते हैं कि 50 सालों से उन्हें उनके मकान की सनद (सरकारी प्रोपर्टी कार्ड) नहीं मिली। नागर पटेल ने कहा कि मकान पर लोन भी नहीं मिलती थी। नारण प्रजापति ने कहा कि कागजात नहीं होने से मकान किसी को बेच भी नहीं सकते थे। रमण प्रजापति ने कहा कि कई सालों से प्रयास किए, लेकिन सफलता अब जाकर मिली है।