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दुर्लभ मामला: 10 वर्ष के बच्चे के मूत्राशय से निकाली 90 ग्राम की पथरी

Ahmedabad: चिकित्सकों ने एक किशोर के मूत्राशय से लगभग 90 ग्राम वज़न और 4 सेंटीमीटर आकार की पथरी निकाली। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में इतनी बड़ी पथरी का बनना अत्यंत दुर्लभ है। सामान्यतः छोटे बच्चों में मूत्राशय की पथरी 1-2 सेंटीमीटर तक ही होती है और लक्षण दिखते ही उपचार कर दिया जाता […]

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LG Hospital Ahmedabad

मरीज के मूत्राशय से निकाली गई पथरी।

Ahmedabad: चिकित्सकों ने एक किशोर के मूत्राशय से लगभग 90 ग्राम वज़न और 4 सेंटीमीटर आकार की पथरी निकाली। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में इतनी बड़ी पथरी का बनना अत्यंत दुर्लभ है। सामान्यतः छोटे बच्चों में मूत्राशय की पथरी 1-2 सेंटीमीटर तक ही होती है और लक्षण दिखते ही उपचार कर दिया जाता है। लेकिन इस मामले में पथरी इतनी बड़ी हो गई कि मरीज को लंबे समय तक तकलीफ़ सहनी पड़ी। महानगरपालिका संचालित एल.जी. अस्पताल के जनरल सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने यह सफल सर्जरी की।सर्जरी विभाग के डॉ. तपन शाह ने बताया कि मरीज को पेशाब में जलन, रुक-रुक कर पेशाब आना, ठंड लगना और बुखार जैसे लक्षणों के साथ ओपीडी में लाया गया था। जांच में मूत्राशय में दो पथरियां मिलीं जो लगभग 4 सेंटीमीटर और 2 सेंटीमीटर की थी। एक्स-रे और सोनोग्राफी रिपोर्ट से स्पष्ट हुआ कि बड़ी पथरी पूरे मूत्राशय में फैली हुई थी। मूत्राशय की पथरी खतरनाक होती है क्योंकि यह पेशाब की नली को ब्लॉक कर सकती है, जिससे मरीज को इमरजेंसी में लाना पड़ता है। कभी-कभी पेट से नली डालनी पड़ती है और किडनी फेल होने का भी खतरा रहता है। इस मामले में ऑपरेशन कर पथरी को सुरक्षित रूप से निकाल लिया गया।

एक लाख में से पांच- दस बच्चों में होती है ऐसी तकलीफ

विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में इस आकार की पथरी की संभावना बेहद कम होती है। 1 लाख में केवल 5-10 मामलों में ही मूत्राशय की पथरी इतनी बड़ी हो सकती है। अपूर्ण पोषण, पर्याप्त पानी न पीना, प्रोटीन की कमी और बार-बार होने वाले मूत्र संक्रमण से पथरी बनने की संभावना बढ़ जाती है।

करनी पड़ी ओपन सर्जरी

डॉ. शाह ने बताया कि ऑपरेशन से पहले एंडोस्कोपिक तकनीक से मूत्र नली की जांच की गई। इसके बाद ओपन सर्जरी की पद्धति अपनाई गई, जिसमें मूत्राशय को खोलकर पथरी को सीधे बाहर निकाला गया। सामान्यतः बच्चों में पथरी का इलाज मिनिमली इनवेसिव तकनीक से किया जाता है, लेकिन जब आकार बहुत बड़ा हो तब ओपन सर्जरी ही सुरक्षित विकल्प होती है। विभागाध्यक्ष डॉ. असित पटेल के मार्गदर्शन में डॉ. शाह, डॉ. मुकेश सुवेरा, डॉ. ध्रुवेश शेठ, डॉ. पार्थ पटेल और एनेस्थीसिया टीम ने मिलकर यह जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की।