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Ahmedabad News: एआईयू का कामकाज होगा डिजिटल, गुजरात के इस संस्थान को मिली जिम्मेदारी

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Ahmedabad News: एआईयू का कामकाज होगा डिजिटल, गुजरात के इस संस्थान को मिली जिम्मेदारी

Ahmedabad News: एआईयू का कामकाज होगा डिजिटल, गुजरात के इस संस्थान को मिली जिम्मेदारी

अहमदाबाद. भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एआईयू) का कामकाज जल्द ही डिजिटल होने जा रहा है। इसके लिए एआईयू ने सूचना एवं पुस्तकालय नेटवर्क केन्द्र (इन्फ्लिबनेट) गांधीनगर को जिम्मेदारी सौंपी है।
यह जानकारी एआईयू की महासचिव डॉ.पंकज मित्तल ने सोमवार से गुजरात विद्यापीठ में शुरू हुए एआईयू के कुलपतियों के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में दी।
उन्होंने कहा कि एआईयू का कामकाज डिजिटल होगा। जिसके तहत एआईयू एडमीशन पोर्टल, जॉब पोर्टल और कोलोबरेशन पोर्टल शुरू करेगा, जहां विद्यार्थी एआईयू से जुड़े विश्वविद्यालयों में किस कोर्स में कितनी सीटें हैं, प्रवेश प्रक्रिया क्या है उसका ब्यौरा पा सकेंगे। नौकरी के लिए आवेदन कर सकेंगे। साथ ही विवि भी अपने बेहतर प्राध्यापक, विभागों की जानकारी उपलब्ध करा सकेंगे ताकि एक विवि दूसरे विवि से संबंध स्थापित कर सके। एआईयू खेलो इंडिया के आयोजन की जिम्मेदारी लेने की तैयारी में है। इसके लिए सरकार को लिखा है। इसके अलावा हर कोर्स एवं क्षेत्र में सेंटर फॉर एक्सीलेंस बनाएंगे।

एआईयू की सदस्यता के लिए यूजीसी के 2 एफ की मंजूरी मिलने के बाद निजी विवि को दो साल इंतजार नहीं करना होगा। यह बाध्यता खत्म कर दी है। उन्होंने कहा कि गांधी जयंती के 150 साल पूरे होने पर हो रहे इस सम्मेलन के लिए गुजरात विद्यापीठ से बेहतर और कोई जगह नहीं हो सकती थी। उन्होंने गांधी विचार को अपनाने की बात कही।
इससे पहले गुजरात विद्यापीठ के कुलनायक डॉ.अनामिक शाह ने विद्यापीठ की स्थापना से लेकर अब तक की गतिविधियों की जानकारी दी। गुजरात विद्यापीठ के निदेशक (एक्सटेंशन) डॉ. राजेन्द्र खीमाणी ने कार्यक्रम का संचालन किया, जबकि कार्यकारी कुलसचिव प्रो.भरत जोशी ने आभार ज्ञापित किया। सम्मेलन में 20 से अधिक विश्वविद्यालयों के कुलपति शिरकत कर रहे हैं।

गांधी विचार को अपने यहां लागू करें विवि
उद्घान समारोह के मुख्य अतिथि एवं यूजीसी के अध्यक्ष डॉ डी.पी.सिंह ने कहा कि गांधी विचार को 150वीं जयंती पर देश के शैक्षणिक संस्थानों को अपने परिसर में लागू करना चाहिए। इसके लिए यूजीसी या अन्य किसी अथोरिटी के परिपत्र का इंतजार नहीं करना चाहिए। विचार को इस तरह से लागू करना चाहिए ताकि वह आज के समय में युवा पीढ़ी को प्रेरित करे। इस मामले में गुजरात विद्यापीठ व गुजरात के गांधीवादी संस्थान अगुवाई ले सकते हैं। यूजीसी उनकी मदद को तैयार है।

गांधी विचार आज भी प्रासंगिक: साळुंखे
एआईयू के अध्यक्ष एवं भारती विद्यापीठ पूणे के कुलपति प्रो.एम.एम.साळुंखे ने कहा कि गांधी विचार आज भी प्रासंगिक हैं। हमें उसे अपनाने की जरूरत है।