
Vadjari vav of Borsad
आणंद. जिले के बोरसद शहर में नगरपालिका के पीछे स्थित ऐतिहासिक वणजारी वाव शिल्प कला का उत्तम नमूना है। तेरह मेहराब वाली यह वाव सात मंजिला है, जो सुरक्षित ऐतिहासिक इमारतों में शामिल हैं। वाव की जर्जर हालत को देखकर कुछ वर्ष पूर्व पुरातत्व विभाग की ओर से यहां मरम्मत की गई और साफ-सफाई करते हुए कीचड़ को बाहर निकला, जिसके चलते अब यह वाव पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है।
ऐतिहासिक महत्व को समेटे हुए यह वाव करीब ६०० वर्ष पुरानी मानी जाती है। बताया जाता है यह वाव अडालज की वाव व दादा हरि की वाव से भी प्राचीन है। कुछ वर्षों पूर्व वाव की स्थिति जर्जर होने लगी तो इसे सुरक्षित इमारतों में शामिल किया गया और पुरातत्व विभाग की ओर से सफाई की गई।
वाव के अंदर रखे शिलालेख के अनुसार वाव का निर्माण विक्रम संवत १५५३ में सावन महीने में किया गया था। वाव का निर्माण करने वाला परिवार स्तंभतीर्थ (फिलहाल खंभात की ओर) का होने का उल्लेख है।
प्राचीन काल में वाव जैसी सार्वजनिक उपयोगिता वाली जलाशय सुविधा प्रदान करने को पुत्र धर्म माना जाता था। इस कलात्मक वाव को तैयार करने का श्रेय वसा सोमा के प्रत्येक पुरुष सदस्य को दिया जाता है, जिनके नाम भी शिलालेख में हैं। यह वाव खंभात के वणजार परिवार ने बनाई होने का उल्लेख भी शिलालेख में किया गया है।
दीवारों की नक्काशी खो रही अस्तित्व :
वाव का प्रवेशद्वार दक्षिण में है। वाव की लम्बाई ६८ मीटर व चौड़ाई ६ से १० मीटर है। अंदर दोनों ओर दीवारों पर कलात्मक शैली में कमल, वेल व पत्तों की अद्भुत नक्काशी है, लेकिन फिलहाल योग्य देखरेख के अभाव में वह नष्ट होने लगी है।
किले जैसी दिखती है वाव
यह वाव बाहर से देखने पर किले जैसी दिखाई देती है। उसके तेरह मेहराबों में अद्भुत नक्काशी है। राज्य में अधिकतर वाव ७ से १० मेहराबों की है, लेकिन बोरसद की इस वाव में १३ मेहराब है और तेरह मेहराबों को पार करने के बाद वाव का मुख्य कुआं दिखाई देता है।
संस्कृत में लिखे शिलालेख के अनुसार इस वाव का निर्माण कार्य विक्रम संवत १५५३ में अर्थात ईस्वीसन १४९७ में हुआ था, जो अडालज की वाव एवं दादा हरि की वाव से भी दो वर्ष पहले हुए था।
ऐतिहासिक महत्व :
इस वाव का ऐतिहासिक महत्व भी है। वाव में एक छोटा सा वहेराई माताजी का मंदिर है, जहां बोरसद शहर में पाटीदार समाज में विवाह के बाद वर-वधू दर्शन करने के लिए जाते हैं।
दो वर्ष पूर्व हो रही थी जर्जर, पुरातत्व विभाग ने कराई मरम्मत
करीब ६०० वर्ष पुरानी यह ऐतिहासिक वाव दो वर्ष पूर्व जर्जर हो गई थी, लेकिन पुरातत्व विभाग ने मरम्मत कराकर इसे देखने को योग्य बनाया है। यह वाव वणजारी वाव के रूप में प्रसिद्ध है। यहां हिन्दू समाज की अस्था भी जुड़ी है। विवाह के बाद पाटीदार समाज के वर-वधू यहां दर्शन करने के लिए जाते हैं। इसके अलावा, त्योहारों पर भी लोग मंदिर के दर्शन करने के लिए जाते हैं। वाव की सुरक्षा के लिए एक चौकीदार भी है। नक्काशी एवं मेहराबों के चलते यह वाव पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है।
-रमेशभाई रबारी-अध्यक्ष, बोरसद नगरपालिका।
Published on:
23 Jul 2019 03:34 pm
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