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Atmanirbhar: मच्छर मारने वाले रैकेट के मोरबी में उत्पादन करने का निर्णय, 12 हजार को मिलेगा रोजगार

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Atmanirbhar: चीन से पूरी तरह आयात होने वाले मच्छर मारने वाले रैकेट के मोरबी में उत्पादन करने का निर्णय,  12 हजार को मिलेगा रोजगार

Atmanirbhar: चीन से पूरी तरह आयात होने वाले मच्छर मारने वाले रैकेट के मोरबी में उत्पादन करने का निर्णय, 12 हजार को मिलेगा रोजगार

अहमदाबाद. चीन के साथ सीमा पर संघर्ष के बाद अब भारत का उद्योग जगत भी खुद उत्पादन कर चीन को टक्कर देने के पूरे मूड में है। विश्व भर में घडिय़ों व टाइल्स के लिए मशहूर गुजरात के औद्योगिक शहर मोरबी ने चीन से पूरी तरह आयात होने वाले मच्छरों को मारने वाले रैकेट (मॉस्क्यूटो किलर रैकेट) के अपने यहां उत्पादन करने का निर्णय लिया है।

एक अनुमान के मुताबिक इसका टर्नओवर करीब 300 करोड़ होगा और इससे करीब 12 हजार श्रमिकों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। इसके अलावा अप्रत्यक्ष रूप से भी इसका लाभ मिलेगा।

मोरबी क्लॅाक मैन्यूफैक्चरर्स अलायंस ने यह सुनिश्चित किया है कि चीन के दाम पर ही यह रैकेट भारत के बाजार में उपलब्ध होगा। साथ ही चीन से बेहतर क्वालिटी का भी होगा। चीनी रैकेट किसी तरह की गारंटी नहीं देता है जबकि इस रैकेट की गारंटी एक वर्ष की होगी। इस उत्पाद के लिए मेटल ग्रील्स, पीसीबी, ट्रांसफॉर्मर, वायर, मेटल पाट्र्स, पैकिंग मटीरियल्स, रिचार्ज बैटरी मोरबी की 150 इंडस्ट्री की ओर से शोध व विकास, मॉल्ड, डिजाइन का भी काम शुरु हो चुका है। एलायंस की ओर से कहा गया कि यहां की अलग-अलग कंपनियां इससे जुड़े उत्पाद तैयार करेगी।
इससे पहले भी मोरबी की इन्हीं 150 कंपनियों ने चीन को टक्कर देने के हिसाब से दीवाल घड़ी, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं, खिलौनों का उत्पादन मोरबी में ही करने का फैसला लिया है जिस पर काम शुरु भी हो गया है।
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ट्रायल प्रोडक्शन शुरू

मोस्क्यूटो किलर रैकेट्स का ट्रायल प्रोड्क्शन शुुरू कर दिया है। इसके प्रत्येक पहलुओं की जांच की गई है। साथ ही भारतीय बाजार में अब तक तीन लाख रैकेट भी बेचे जा चुके हैं। रैकेट का उत्पादन का निर्णय आत्मनिर्भर अभियान की अपील के तहत किया गया है। आत्मनिर्भर अभियान को लेकर लोगों के साथ-साथ व्यापारियों की मानसिकता में भी बदलाव हो रहा है।

जयसुख पटेल, एमडी, अजंता ओरेवा ग्रुप, मोरबी