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गुजरात में बढ़ रही बांस की खेती, 3 सालों में किसानों की संख्या हुई दोगुनी

Bamboo cultivation increasing in Gujarat, National bamboo mission विश्व बांस दिवस पर विशेष, 18 सितंबर को मनाया जाता है विश्व बांस दिवस, नेशनल बांस मिशन के तहत 2020-21 में 306 किसानों को मिला था लाभ 2022-23 में संख्या हुई 646

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गुजरात में बढ़ रही बांस की खेती, 3 सालों में किसानों की संख्या हुई दोगुनी

गुजरात में बढ़ रही बांस की खेती, 3 सालों में किसानों की संख्या हुई दोगुनी

Ahmedabad. बांस की खेती से मुंह फेरने वाले किसान अब एक बार फिर इसकी खेती में दिलचस्पी दिखाने लगे हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गुजरात में न सिर्फ बांस की बुवाई का रकबा बढ़ा है, बल्कि खेती के लिए आगे आने वाले किसानों की संख्या में भी इजाफा हुआ है।वर्ष 2019-20 में बांस की बुवाई, इसकी खेती करने वाले किसानों की स्थिति बेहतर करने के लिए

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की केन्द्र सरकार ने नेशनल बांस मिशन शुरू किया। इसके तहत बांस की खेती करने वाले किसानों को सरकार वित्तीय सहायता -प्रोत्साहन देती है।गुजरात में लागू इस मिशन के तहत तीन सालों में बांस की खेती करने वाले किसानों (लाभार्थियों) की संख्या दुगुनी हो गई है। योजना शुरू होने के बाद वर्ष 2020-21 में इस योजना का 306 किसान लाभ ले रहे थे, 2022-23 में इनकी संख्या दुगुनी बढ़कर 646 हो गई है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की सरकार भी राज्य में बांस की खेती को प्रोत्साहित कर रही है।

आज भी मंडप, संगीत के साधन, साज सज्जा में बांस का बोलबाला

बांस एक अत्यंत उपयोगी वृक्ष है, जिसका उपयोग प्राचीन समय में घर तथा मकानों की मजबूती को होता था। समय बदला तो मकान में उपयोग कम हो गया, लेकिन आज भी विवाह मंडप, संगीत के संसाधन-उपकरण, घर की सजावट में इसका बोलबाला है। बांस से आयुर्वेदिक औषधियां भी बनाई जाती हैं। बांस से बने व्यंजन भी लोकप्रिय हैं। बांस के प्रति जारुकता बढ़ाने, इसके संरक्षण के लिए हर वर्ष 18 सितंबर को वर्ल्ड बांस संगठन की ओर से विश्व बांस दिवस मनाया जाता है।

गुजरात में बढ़ रहा बांस का रकबा

गुजरात के सामाजिक वनीकरण विभाग के अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ. ए. पी. सिंह के अनुसार नेशनल बांस मिशन के तहत बीते 3 वर्षों में बांस की खेती के चलते बुवाई क्षेत्र में भी वृद्धि हुई है। वर्ष 2020- 21 में राज्य में बांस का बुवाई क्षेत्र 897 हेक्टेयर था और 306 लाभार्थियों ने सरकारी योजना के तहत वित्तीय लाभ लिया था। आज वर्ष 2022-23 में बांस का बुवाई क्षेत्र बढ़कर 1226 हेक्टेयर हो गया है। लाभार्थियों की संख्या भी बढ़कर 646 हुई है। किसानों व अन्य लोगों को को बांस से बेहतर वस्तुएं बनाने की ट्रेनिंग भी दी जाती है।

हाईडेंसिटी, ब्लॉक बुवाई मॉडल अपनायासिंह ने बताया कि किसानों को बांस की बुवाई के लिए प्रेरित करने को, स्वयंसहायता समूहों को टार्गेट करते हुए योजनाएं बनाई हैं। जिससे अधिक से अधिक किसान कम खर्च से इसमें जुड़ सकें, अपनी आय बढ़ा सकें। इसके तहत हाई डेंसिटी मॉडल तथा ब्लॉक बुवाई मॉडल अपनाया है। बांस की खेती करने वाले किसानों को प्रति पौधा तीन वर्ष के लिए 120 रुपए की वित्तीय सहायता दी जाती है। इन दोनों मॉडल से बुवाई करने के लिए किसान को पहले वर्ष में 60 रुपए, दूसरे वर्ष में 36 रुपए तथा तीसरे वर्ष में 24 रुपए मदद दी जाती है। इस प्रकार से तीन वर्ष में कुल 120 रुपए की वित्तीय सहायता दी जाती है।

राज्य के 15 जिलों में बांस, दो प्रजातियां

बांस की पंजीकृत कई प्रजातियों में से केवल दो प्रजातियां-डेंड्रोकैलेमस स्ट्रिक्ट्स (मानवेल) तथा बाम्बूसा अरुंडीनेसिया (काटस) गुजरात में पाई जाती हैं। राज्य के दक्षिण, मध्य तथा उत्तर गुजरात के 15 जिलोंके हिस्सों में बांस पाया जाता है। बांस का क्षेत्रफल 3547 वर्ग किलोमीटर है। नर्मदा, डांग तथा दक्षिण गुजरात के तापी, सूरत व वलसाड ज़िलों में बांस के वन है।