
Ahmedabad, Mehsana, Palanpur News : वेस्ट से बेस्ट व लकड़ी, लोहे बने खिलौने कर रहे आकर्षित
संकेत सिडाना/राजेन्द्र धारीवाल
महेसाणा/पालनपुर. कोरोना महामारी के कारण एक ओर डिजिटल प्लेटफार्म लोगों की जरूरत बन गया है तो दूसरी ओर वेस्ट से बेस्ट व लकड़ी, लोहे बने खिलौने भी आकर्षित कर रहे हैं।
ऑनलाइन कक्षाओं में विद्यार्थियों को मोबाइल फोन, लैपटॉप व कंप्यूटर के जरिए अध्ययन करवाया जा रहा है लेकिन नेटवर्क उपलब्ध नहीं होने के कारण बच्चों को पेड़ पर चढ़कर अपनी जान खतरे में डालनी पड़ रही है। दूसरी ओर बच्चों के लिए खिलौने बनाने और बिक्री करने वालों को भी नए-नए तरीके अपनाने पड़ रहे हैं।
महेसाणा जिले की कडी तहसील के वडु गांव निवासी नितेश प्रहलादभाई पटेल (22 वर्ष) नई वस्तुएं बनाने का शौकीन है। कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन के समय का सदुपयोग उसने नए-नए खिलौने बनाकर किया। उसने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से मन की बात में वेस्ट से बेस्ट बनाने के बारे में किए गए उल्लेख के अनुरूप भंगार से खिलौने तैयार किए।
तकनीकी अध्ययन से दूर रहकर भी नितेश ने बाजार से भंगार का सामान लाकर अपनी इच्छा के अनुरूप कम खर्च में खेती के उपयोगी ट्रैक्टर, थ्रेसर, ट्रैक्टर-ट्रॉली, फावड़े के अलावा ट्रक, जीप, बाइक आदि खिलौने तैयार किए। नितेश के अनुसार कृषक पुत्र होने के कारण उसने खेती की उपयोगी वस्तुओं के खिलौने बनाए। करीब एक हजार रुपए का भंगार का सामान लाकर बनाए गए खिलौने वह अपने मित्र के जन्मदिन पर उपहार में भी देता है।
नितेश के पिता प्रहलादभाई के अनुसार चीन के खिलौने भारत में आते थे लेकिन अंतरराष्ट्रीय सीमा विवाद के चलते चीन के एप सहित विभिन्न वस्तुओं का उपयोग भारत में बंद किया है। ऐसे में युवाओं को प्रोत्साहित कर मदद की जाए तो भारत भी खिलौने के क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है।
इसी प्रकार मूल राजस्थान के बूंदी निवासी व वर्तमान मेंं बनासकांठा जिला मुख्यालय पालनपुर में खिलौने बेचने आए मेरू बावरिया लकड़ी व लोहे से ट्रैक्टर, ट्रॉली, ट्रक आदि खिलौने स्वयं ही बनाकर बेच रहे हैं। ये खिलौने लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र बने हैं। उनके अनुसार अलग-अलग आकार के ट्रक व ट्रैक्टर की कीमत इनको बनाने में उपयोग किए जाने वाले लोहे व लकड़ी पर निर्भर है।
उनके अनुसार प्रतिदिन प्रत्येक 500 से 1500 रुपए कीमत के 8-10 ट्रैक्टर, 600 से 2 हजार रुपए कीमत के 5-7 ट्रक रूपी खिलौनों की बिक्री होती है। इनमें से प्रत्येक की बिक्री से 100 से 150 रुपए का मुनाफा होता है। फिलहाल परिवार के 10 सदस्य पालनपुर में अलग-अलग स्थानों पर यह खिलौने बेच रहे हैं। बावरिया परिवार के यह सदस्य अलग-अलग शहरों में वर्ष में करीब 20 लाख रुपए के खिलौने बेच रहे हैं। सभी प्रकार का खर्च निकालने के बाद वर्ष में 2-3 लाख रुपए की कमाई होती है।
Published on:
21 Sept 2020 12:08 am

बड़ी खबरें
View Allअहमदाबाद
गुजरात
ट्रेंडिंग
