गांधीनगर. यूं तो पतंग महोत्सव पतंगबाजों के लिए उमंग और उत्साह लेकर आता है, लेकिन कई बार पतंग की डोर बेजुबान परिंदों के लिए दर्द बन जाता है। ऐसे में पतंगबाजों की धारदार डोर से चोटिल होने वाले परिंदों को बचाने में जीवदया प्रेमी भी पीछे नहीं है। ऐसी ही एक जीवदया प्रेमी संस्था है पारेवडा ग्रुप, जिसने ओढ़व में पशु अस्पताल में बकायदा ऑपरेशन थिएटर प्रारंभ किया है, जहां घायल परिंदों का लाया जाता है और उनका उपचार करने के बाद खुले आसमान में उन परिंदों का छोड़ दिया जाताहै। अब तक करीब साढ़े चार सौ घायल परिंदों को यहां लाकर मरहमपट्टी की गई है। अक्सर, राज्य सरकार भी पतंगबाजों से सुबह नौ बजे से पहले और शाम पांच बजे के बाद पतंग नहीं उड़ाने का अनुरोध भी करती हैं।
पारेवडा ग्रुप की कार्यकारी अध्यक्ष और स्वयंसेवक रेनू गौतम बताती हैं कि उत्तरायण के पहले से ही जागरुकता अभियान प्रारंभ किया जाता है। घर-घर जाकर आमजन को जागरुक भी करते हैं। 12 जनवरी से अहमदाबाद के अलग-अलग इलाकों में केन्द्र खोले गए हैं, जहां से घायल परिंदों को लाया जाता है। इसके लिए कॉल सेन्टर भी है जहां रोज सैकड़ों फोन आते हैं। अब तक 450 से ज्यादा घायल परिंदों का उपचार किया गया है, जिसमें कबूतर, चील, मोर जैसे पक्षी हैं।
वे बताती हैं कि तीन से चार दिनों तक इन परिंदों को रखा जाता है। जब ये उडऩे लायक हो जाते हैं तो उन्हें छोड़ दिया जाता है। इसके लिए पिंजरे बनाए गए हैं, जिसमें उनको सुरक्षित रखा जाता है। पशु चिकित्सक और स्वयंसेवक चौबीस घंटे सेवाएं देते हैं। यहां प्रदर्शनी बनाई गई है, जिसमें आमजन को पक्षियों के बारे में जागरूक किया जाता है ताकि उनमें जीवदया की भावना जागरुक हो।