अहमदाबाद. एशिया के सबसे बड़े अहमदाबाद के असारवा स्थित सिविल अस्पताल में यूं तो अब तक 111 ब्रेनडेड व्यक्तियों के परिजनों ने अंगदान किया है। लेकिन रविवार को हुए ब्रेनडेड व्यक्ति के अंगदान का मामला इन सब में काफी अनूठा और प्रेरणादायी है। इसके चलते तीन लोगों को नया जीवन मिला है। यह 112वां ब्रेनडेड व्यक्ति का अंगदान है।
दरअसल ब्रेनडेड घोषित हुए अंगदान की सहमति ब्रेनडेड घोषित किए गए व्यक्ति की उपचाराधीन पत्नी ने अस्पताल में भर्ती रहते हुए दी। वह खुद राजकोट के अस्पताल में भर्ती है। इसकी सहमति देने के लिए अहमदाबाद सिविल अस्पताल की सोट्टो टीम राजकोट पहुंची थी। विपरीत स्थिति के बावजूद पत्नी ने प्रेरणादायी निर्णय लेते हुए दूसरों को नया जीवन मिले इसके लिए अंगदान की सहमति दे दी।राजकोट निवासी मुकेश राणा (30) पिछले दिनों अपने पुत्र और पत्नी को लेकर बाइक से जा रहे थे। उस दौरान सड़क दुर्घटना में तीनों लोग बुरी तरह से घायल हो गए। मुकेश के सिर में गंभीर चोट आने के कारण अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में रेफर किया गया था जबकि उनके पुत्र और पत्नी को राजकोट अस्पताल में भर्ती किया गया था। अहमदाबाद सिविल अस्पताल में चिकित्सकों के अथक प्रयास के बावजूद मुकेश की हालत में सुधार नहीं हुआ। अंत में शनिवार को उनकी जरूरी जांच की गई जिसमें उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। राजकोट में पत्नी उपचाराधीन थी जबकि पति को अहमदाबाद में ब्रेन डेड घोषित किया गया।
विपरीत परिस्थितियों में परिजनों को समझायाअहमदाबाद सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने बताया कि इस मामले में स्थिति काफी विपरीत थी। एक ओर मुकेश अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में ब्रेन डेड घोषित किए गए वहीं दूसरी ओर मुकेश की पत्नी और पुत्र राजकोट में उपचाराधीन थे। इसके बावजूद सिविल अस्पताल टीम राजकोट में पत्नी और अन्य परिजनों से अंगदान की सहमति लेने पहुंची थी। अंगदान अभियान में सेवा देने वाले दिलीप देशमुख व अस्पताल के चिकित्सक डॉ. तीर्थ ने राजकोट में जाकर मुकेश की पत्नी और परिजनों को समझाया। जिस पर उन्होंने ब्रेनडेड घोषित किए गए मुकेश के अंगों के दान की सहमति दे दी। डॉ. जोशी ने कहा कि यह अपने आप में अनूठा अंगदान था। इससे और भी कई लोगों को प्रेरणा मिलेगी। इससे तीन लोगों को तो नया जीवन मिला ही है।