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अहमदाबाद के सुमित का दिल मुंबई में धडक़ेगा तो फेफड़े भरेंगे चेन्नई में सांस

अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में 61 वें ब्रेन डेड के अंगदान जरूरतमंद पांच को मिलेगा जीवन

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अहमदाबाद के सुमित का दिल मुंबई में धडक़ेगा तो फेफड़े भरेंगे चेन्नई में सांस

अहमदाबाद के सुमित का दिल मुंबई में धडक़ेगा तो फेफड़े भरेंगे चेन्नई में सांस

अहमदाबाद. शहर के मणिनगर क्षेत्र निवासी सुमितसिंह राजपूत भले ही अब इस दुनिया में नहीं है लेकिन उनका दिल मुंबई में धडक़ेगा और फेफड़े चेन्नई में सांस भरेंगे। 32 वर्षीय इस युवक की दो किडनी और लिवर का भी दान किया गया है । अहमदाबाद के ही सिविल अस्पताल कैंपस के इंस्टीट्यूट ऑफ किडनी डिजिज एंड रिसर्च सेंटर (आईकेडीआरसी) में इन तीन अंगों को जरूरतमंदों को प्रत्यारोपित किया गया है।
दरअसल Sumit singh Rajput सुमितसिंह राजपूत के सिर में पिछले दिनों गंभीर चोट लगने के कारण उन्हें Civil hospital सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया गया। जहां दो दिन तक जीवन और मौत के बीच में रहे सुमित को Brain dead ब्रेन डेड घोषित किया गया। अस्पताल में कार्यरत State Organ Tissue and Transplant Organization (SOTTO) स्टेट ऑर्गन टिश्यु एंड ट्रान्सप्लान्ट ऑर्गेनाइजेशन (सोटो) की टीम की ओर से जानकारी देने पर सुमित के परिजनों ने अंगदान की सहमति दी। जिसके चलते हृदय, फेफड़े, लिवर और दो किडनी दान में दी गई। इनमें से हृदय को प्रत्यारोपण के लिए मुंबई स्थित एक अस्पताल तथा फेफड़ों को चेन्नई के अस्पताल में भेजा गया। इन अंगों को एयरपोर्ट तक ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से भेजा गया। चेन्नई में जरूरतमंद मरीज को फेफड़ों का औक मुंबई में एक मरीज को हृदय को प्रत्यारोपित किया जाएगा। इसके अलावा दो किडनी और लिवर का प्रत्यारोपण आईकेडीआरसी में जरूरतमंद तीन मरीजों को किया गया। इस तरह से सुमित के अंगों से पांच जरूरतमंदों को नया जीवन मिला है।

अंगदान के संबंध में जागरुकता तेजी से बढ़ी

एशिया के सबसे बड़े सिविल अस्पताल में पिछले लगभग डेढ़ वर्ष में ब्रेन डेड 61 अंगदाता बने हैं। इतनी बड़ी संख्या में ब्रेनडेड दाताओं के अंग मिलना दर्शाता है कि अंगदान को लेकर राज्य में जागरुकता तेजी से बढ़ी है। 61 वां ब्रेनडेड अंगदाता राजपूत समाज का युवक है। जिसकी वजह से पांच जरूरतमंदों को नया जीवन मिला है।

डॉ. राकेश जोशी
चिकित्सा अधीक्षक सिविल अस्पताल


... उन्हें मिले लंबा जीवन
पुत्र भले ही जीवित नहीं है लेकिन जिस मरीज में उसके अंगों का प्रत्यारोपण हो उसे लंबी जिन्दगी मिले। पुत्र के नहीं रहने पर उसके अंगों से किसी की जान बचे तो इससे श्रेष्ठ परिवार के लिए और कुछ नहीं है। यही सोचकर सुमित के अंगों का दान करने के लिए परिवार ने निर्णय लिया है।

जोगिन्दरसिंह राजपूत, ब्रेन डेड सुमित के पिता
मणिनगर अहमदाबाद