
Ahmedabad. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि समाज के सुदूरवर्ती व्यक्ति को मुख्यधारा में लाना ही सच्ची राष्ट्रसेवा है। बाबासाहेब की ओर से भारत के संविधान की प्रस्तावना में उल्लिखित प्रतिष्ठा और अवसर की समानता' शब्द ही हमारा अंतिम लक्ष्य है। वे मंगलवार को गांधीनगर स्थित लोकभवन (राजभवन) में आंबेडकर जयंती पर मंगलवार को आयोजित सामाजिक समरसता महोत्सव को संबोधित कर रही थीं।
राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा ही विकास की सच्ची कुंजी है। विशेषकर वंचित और पिछड़े वर्गों के लोग अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए प्रेरित हों, यह सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने नैतिक शिक्षा के माध्यम से सामाजिक समरसता की भावना को मजबूत करने पर विशेष बल दिया।राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय समाज का निर्माण समरस गांवों के बिना संभव नहीं है। गांवों में आज भी जाति-भेद से ऊपर उठकर जो परस्पर प्रेम और सौहार्द दिखाई देता है, वही सच्ची भारतीयता है। जब गांव आत्मनिर्भर और सुविधायुक्त बनेंगे, तभी भारत सही अर्थों में विकसित बनेगा।
अपने पिता की सीख को याद करते हुए राष्ट्रपति भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि जब मैं पढ़ती थी तब मेरे पिता कहते थे, चाहे जितने बड़े बन जाओ, लेकिन हमेशा मुड़कर यह अवश्य देखो कि कोई जरूरतमंद पीछे न रह जाए। आपकी व्यक्तिगत सफलता तभी सार्थक मानी जाएगी जब वह समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान में काम आए।
राष्ट्रपति ने गुजरात में चल रहे सामाजिक समरसतायुक्त सर्वसमावेशी विकास के प्रयासों के लिए गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल प्रयासों की सराहना की। उन्होंने गुजरात के डेयरी उद्योग और पशुपालकों के परिश्रम की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत आज विश्व में दूध उत्पादन में प्रथम स्थान पर है, जिसमें गुजरात की सहकारी संस्थाओं और पशुपालकों की भूमिका अग्रणी है।
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के जीवन को संघर्ष और तपस्या का प्रतीक बताया। राज्यपाल ने अपने संकल्प के बारे में बात करते हुए कहा कि वे गुजरात के 267 तहसीलों में जाकर गांवों में रात्रि विश्राम कर जनसंवाद करेंगे। प्रधानमंत्री के 'एक पेड़ मां के नाम' और स्वच्छता अभियान से गांवों का कायाकल्प करना उनका लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब आंबेडकर के सपने को पूरा करने के लिए एकजुट और सशक्त भारत बनाने के लिए सामाजिक समरसता अनिवार्य है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने सभी को समान अवसर और सामाजिक न्याय के जरिए नारी शक्ति सहित सभी के विकास की वकालत की। उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि गुजरात की यह पुण्यधरा हमेशा सामाजिक न्याय और समरसता की साक्षी रही है। इस अवसर पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. प्रद्युम्न वाजा, राज्य मंत्री डॉ. मनीषाबेन वकील, गुजरात के गांवों से आए नागरिक और उनके परिवारजनों के अलावा कई पदाधिकारी और अधिकारी उपस्थित रहे।
Published on:
14 Apr 2026 11:14 pm
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