
अहमदाबाद, ऐसी दीवारें जो कुछ दिन पहले तक गंदी, पोस्टर और बैनर से बेरंग नजर आ रही थीं उन दीवारों पर अब कहीं बुलेट ट्रेन नजर आ रही तो कहीं अतीत का गौरव (भाप का इंजन) से अटी दिख रही हैं तो 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओÓ, 'सर्व शिक्षा अभियानÓ जैसे सामाजिक संदेश भी दिए जा रहे हैं। वहीं ऐसी बंजर जमीन जहां पर कंकरीट के स्लीपर, कूड़ा और मिट्टी का ढेर लगा था उस जमीन पर अब फूलों की बहार है। इन दिनों यह नजारा देखने को मिल रहा है कि अहमदाबाद मंडल के कांकरिया कोचिंग डिपो और साबरमती डीजल शेड में।
अब यदि कांकरिया कोचिंग डिपो की बात की जाए तो कुछ वक्त पहले यहां के कार्यालय की दीवारें बदरंग नजर आती थीं। कहीं पर पोस्टर तो कहीं बैनर नजर आते थे, लेकिन अब इन दीवारों पर पेन्टिंग कर खूबसूरत बनाया जा रहा है। अब सबसे बड़े ताज्जुब की बात यह है कि यह पेन्टिंग कोई पेशेवर पेन्टर नहीं नहीं बल्कि वे रेलकर्मी बना रहे हैं जो कोचिंग डिपो में हमेशा औजारों के बीच रहते हैं। कोचिंग डिपो को खूबसूरत बनाने का खाका तैयार किया है वरिष्ठ कोचिंग डिपो अधिकारी एस.टी राठौड़ ने तो वरिष्ठ खंड अभियंता अतानु घोष अपने साथी रेलकर्मियों के साथ उसे गति दी। रेलकर्मी नरेश कुमार इन दिनों कोचिंग डिपो में पेन्टिंग करते नजर आ रहे हैं। उन्होंने दीवारों पर जहां 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओÓ का सामाजिक संदेश लिखकर जहां बेटियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया तो शिक्षा को प्रोत्साहित करने को 'सर्व शिक्षा अभियानÓ के साथ बच्चों को पढ़ते दिखाया है। वहीं कैशलेस को बढ़ावा देने को डिजिटल इंडिया का भी संदेश दिया है। वहीं कोचिंग डिपो में ही एक फव्वारा बनाया गया है, जो वेस्ट से बेस्ट में बदला गया। फव्वारा पाइप, लोहे के तगाड़े, स्टील की गगरी से बनाया गया है तो पेन्टिंग को सजाया गया। वहीं अतीत बन चुके भाप के इंजन को भी दीवारों बनाया गया, जो भावी रेलकर्मियों के लिए संदेश होगा।
वहीं कांकरिया कॉम्प्लेक्स स्थित सवारी डिब्बा मरम्मत केन्द्र की दीवार पर जहां नदी के पुल से गुजरती बुलेट ट्रेन को दौड़ते हुए उकेरा गया है। वहीं इस केन्द्र के पास ही जहां सिक लाइन के आसपास बंजर पड़ी जमीन में बगीचा बनाकर हरियाली लाई गई है, जहां मोगरा, गेंदा के फूल, मक्का, सहजन लहलहा रहे हैं। ऐसे चार बगीचे बनाए गए हैं।
उधर, साबरमती डीजल शेड में बारह नए बगीचे बनाए गए हैं, जहां बेस्ट से बनाया गया है, जहां बोतलों को काटकर पौधे रोपे गए हैं। जहां अलग-अलग विभाग रेलकर्मियों ने विकसित किया है।
कोचिंग डिपो के अधिकारी एस.टी. राठौड़ ने बताया कि पिछले वर्ष बारिश के पहले ही कोचिंग डिपो को नया रूप देना शुरू किया था। चाहे पेन्टिंग हो या फिर बगीचे का निर्माण हो यह सब रेलकर्मियों के श्रमदान से हुआ है। पौधे नर्सरी से लाए गए। अभी और भी जहां पर कंकरीट के स्लीपर, मलबा या फिर झाडिय़ां हैं उनको समतल कर विकसित किया जाएगा।
अहमदाबाद मंडल के जनसंपर्क अधिकारी प्रदीप शर्मा ने बताया कि चाहे कोचिंग डिपो हो या फिर डीजल शेड , जहां बगीचे बनाकर और पेन्टिंग बनाकर खूबसूरत बनाकर रेलकर्मियों को बेहतर माहौल देने का प्रयास है। रेलकर्मी खुद ही ये बगीचे और पेन्टिंग कर रहे हैं।
Published on:
04 Apr 2018 10:39 pm
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