
बच्चों की जांच करते स्वास्थ्यकर्मी।
गोधरा. पंचमहाल जिले में मानसून की शुरुआत के साथ ही चांदीपुरा वायरस का प्रकोप सामने आया है। गोधरा तहसील के विंझोल और सरदारपुरा गांव के दो बच्चों की मौत हो गई। दोनों बच्चों को अचानक तेज बुखार आने के बाद दौरे पड़ने लगे। उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए गोधरा सिविल अस्पताल लाया गया। स्थिति गंभीर होने पर उन्हें वडोदरा के एसएसजी अस्पताल में भेजा गया। उपचार के दौरान दोनों बच्चों की मौत हो गई।
इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत कार्रवाई की। प्रभावित दोनों गांवों में सघन निगरानी आरंभ की गई। वायरस के प्रसार को रोकने के लिए गांवों में कीटनाशकों का छिड़काव किया जा रहा है। सैंड फ्लाई (बालू मक्खी) के प्रजनन स्थलों को नष्ट करने के लिए कच्चे मकानों की दीवारों की दरारें भरने का कार्य भी तेज गति से किया जा रहा है।
निगरानी के दौरान स्वास्थ्य विभाग को इन क्षेत्रों से लगभग 260 सैंड फ्लाई मिली। स्थिति पर नियंत्रण के लिए पंचमहाल जिले में कुल 682 स्वास्थ्य टीमों को तैनात किया गया है। इनमें से 10 विशेष टीमों ने विंझोल और सरदारपुरा क्षेत्र की गहन जांच की। जांच के दौरान संदिग्ध लक्षणों वाले 4 बच्चों के नमूने लिए। इनमें से 2 बच्चों की मौत हो गई, जबकि अन्य 2 बच्चों के नमूने नकारात्मक आने पर प्रशासन ने राहत महसूस की।
मोरबी. जिले के जेतपर में अनशनकारियों ने पारणा कर आंदोलन के 19वें दिन दूसरा चरण पूरा किया। उन्होंने सरकार के परिपत्र को अमान्य बताते हुए उसे अस्वीकार कर दिया। साथ ही नए परिपत्र की मांग की। जानकारी के अनुसार, खेतों पर निजी कंपनी के बिजली के खंभे और केबल लगाने के मुआवजे की मांग पर शुरू किए गए उपवास आंदोलन में एक के बाद एक उपवासियों का स्वास्थ्य बिगड़ रहा था।
युवाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए और चिकित्सकों की सलाह पर, नेहुल अमृतिया के बाद सभी अनशनकारियों ने संतों और गांव की बेटियों के हाथों पारणा किया। उपवासियों ने कहा कि सरकार का परिपत्र मान्य नहीं है क्योंकि इसमें कई कमियां हैं। उन्होंने एक नया परिपत्र जारी करने की मांग की।
जेतपर गांव में सोमवार रात एक सभा आयोजित की गई, इसमें संत दामजी भगत और गांव की बेटियों के हाथों अनशनकारियों ने पारणा किया। हालांकि यह घोषणा भी की गई कि आंदोलन पूर्ण नहीं हुआ है और संघर्ष जारी रहेगा। साथ ही तीसरे चरण को शुरू करने की तैयारी दर्शाई गई।
सभा में ग्रामवासियों के समक्ष ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल्स विभाग के 4 जुलाई के प्रस्ताव का पूर्ण अध्ययन किया गया और ग्रामवासियों ने इस पर चर्चा-विचार किया। प्रस्ताव के अनुसार, टेलीग्राफ अधिनियम 1885 की धारा 10 (घ) के तहत खंभों और तारों से होने वाले नुकसान की क्षतिपूर्ति नहीं होती है। इसलिए सर्वसम्मति से प्रस्ताव को अस्वीकार कर अमान्य किया गया।
अब सत्याग्रह की तैयारी
सरकार से कहा गया है कि प्रस्ताव रद्द कर तत्काल नया प्रस्ताव पारित किया जाए और पूर्ण क्षतिपूर्ति के संबंध में प्रस्ताव आगामी सात दिनों में जारी नहीं किया गया तो ग्रामवासी सरकार के विरुद्ध सत्याग्रह करने को तैयार हैं।
Updated on:
07 Jul 2026 10:07 pm
Published on:
07 Jul 2026 10:06 pm
