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Corona: करगिल योद्धा दिनेश अब लड़ रहे हैं कोरोना के खिलाफ जंग

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Corona: करगिल योद्धा दिनेश अब लड़ रहे हैं कोरोना के खिलाफ जंग

Corona: करगिल योद्धा दिनेश अब लड़ रहे हैं कोरोना के खिलाफ जंग

गांधीनगर. करगिल युद्ध में दुश्मनों को सबक सिखा चुके योद्धा दिनेश कुमार पुरोहित अब अहमदाबाद के सिविल अस्पताल मे ंकोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं। कोरोना के खिलाफ जंग करगिल जंग से कम नहीं है।
पुरोहित बताते हैं कि करगिल युद्ध के मैदान में दुश्मन ऊंचाई पर था। फिर भी उनको अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से देख सकता था और प्रहार भी कर सकता था, लेकिन कोरोना अदृश्य दुश्मना है। कोरोना के खिलाफ जंग में कोरोना नाम का यह दुश्मन शरीर के किसी भी हिस्से से घुस रहा है। मौजूदा उपकरणों से भी उसका पता लगाना मुश्किल हो गया है। दवाइयों से भी उस पर काबू पाना चुनौती साबित हो रहा है।
करगिल युद्ध को याद करते पुरोहित कहते हैं कि इस युद्ध में उनकी ड्यूटी सैनिकों को रसद पहुंचाने की थी। बहादुर सैनिकों को तक मुझे हथियार, खाने-पीने का सामग्री और अन्य हथियार पहुंचाना होता था। युद्ध में साथी शहीदों के शव देखकर दिल भर आता था, लेकिन दूसरी ही क्षण युद्ध में फतह करने में फिर जुट जाते। किसी भी हालत में दुश्मन को शिकस्त देना ह लक्ष्य था। करगिल युद्ध की जंग में जीत हासिल करने वाले पुरोहित कोरोना संक्रमित हैं, जो बड़े जोश और धैर्य के हथियार से कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं। उन्हें दृढ़ विश्वास है कि वे कोरोना के खिलाफ भी जंग में फतह हासिल करेंगे।
वे कहते हैं कि सिविल अस्पताल में बेहतर से बेहतर उपचार दिया जा रहा है। चिकित्सक उपचार में पूर्णत: संवेदनशीलता बरत रहे हैं। भले ही परिवार से अलग होंगे, लेकिन मरीजों को दिलासा मिल रही है। पैरा मेडिकल स्टाफ और पेंशन्ट अटेण्डेन्ट भी बेहतर सेवा दे रहे हैं। सिविल अस्पताल के बेहतर सेवा ही नई उम्मीद जगी है।
करगिल युद्ध की तरह करेंगे घर वापसी
करगिल योद्धा का उपचार करने वाले कोरोना योद्धा डॉ. कार्तिकेय परमार कहते हैं कि दिनेश कुमार पुरोहित ने लम्बे समय तक देश की सेवा की है। वे अब कोरोना नाम के दुश्मन का सामना कर रहे हैं। ऐसे में पूर्व सैनिक दिनेश कुमार को बचाने के लिए हम हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। सामान्य सर्दी और खांसी होने जैसे कोरोना लक्षणों के साथ वे 1200 बेड कोविड अस्पताल में भर्ती हुए थे। उनका रक्त जांच कराने पर स्थिति गंभीर नजर आई थी। सांस लेने मे भी दिक्कत हो रही थी। उन्हें तुरंत ही टोसीलीजुमेब इंजेक्शन दिया तो हालत में सुधार हुआ। फिलहाल वे स्वस्थ हैं। विश्वास है कि करगिल युद्ध की तरह से कोरोना की जंग में जीतेंगे और घर वापसी करेंगे।
करगिल युद्ध आज होंगे 21 वर्ष
गौरतलब है कि करगिल युद्ध को रविवार को 21 वर्ष पूर्ण हुए हैं। ६0 दिनों से ज्यादा चले करगिल युद्ध में कई बहादुर सैनिकों की बहादुरी और बलिदान से 26 जुलाई को टाइगर हिल पर हमारे सैनिकों ने तिरंगा फहराया था। करगिल युद्ध की याद में हर वर्ष विजय दिवस मनाया जाता है।

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