कपास दिवस पर विशेष
गांधीनगर. कपास के उत्पादन में भारत दुनियाभर में दूसरे स्थान पर है। वहीं देश में सबसे ज्यादा कपास का उत्पादन गुजरात में होता है। कपास में शंकर किस्म की शोध में भी हमारा राज्य दुनियाभर में प्रथम स्थान पर है। यह देश की सबसे अहम फसलों में है।
भारत में हजारों वर्षों से कपास का उत्पादन कर रहा है। देश के लाखों किसान कपास फसल की पैदावार कर आजीविका प्राप्त करते हैं और लाखों लोग कपास उद्योग में कार्य करते हैं।गुजरात में इस वर्ष कपास की रिकार्ड बुवाई हुई है। इस वर्ष अब तक 26 लाख से ज्यादा हेक्टेयर में कपास का बुवाई की गई है, जो पिछले आठ वर्षों में सबसे ज्यादा है। गुजरात में मुख्यत: सौराष्ट्र के जिलों में सबसे ज्यादा कपास का उत्पादन होता है। जामनगर जिले में औसतन 3,49,000 हेक्टेयर में बुवाई की गई है, जिसमें सबसे ज्यादा हेक्टेयर में कपास की बुवाई हुई। जिले में इस वर्ष अब तक करीब 1,78,154 हेक्टेयर में कपास की बुवाई की गई। इसमें पिछले वर्ष की तुलना में बुवाई में 18,971 हेक्टेयर में वृद्धि हुई। जामनगर के कालावड तहसील में इस वर्ष सबसे ज्यादा कपास की बुवाई की गई।
जामनगर तहसील के बजरंग गांव के किसान कांति भाई ने कहा कि राज्य सरकार की सौनी योजना के तहत किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिल रहा है, जिससे कपास की बुवाई करनेवाले किसानों को काफी फायदा हुआ है। सौराष्ट्र में कपास की अच्छी पैदावार होती है। काली और पानी वाली जमीन में कपास की अच्छी पैदावार होने से कपास की बुवाई करनेवाला किसानों और छोटे किसानों को काफी फायदा हुआ है। इस वर्ष बारिश की कमी होने से राज्य सरकार ने सौनी योजना के तहत किसानों को सिंचाई के लिए पानी देना प्रारंभ किया है। इसके चलते कपास की बुवाई करने वालों को फायदा हुआ है।उन्होंने कहा कि 20 बीघा जमीन में कपास की बुवाई की है। औसतन एक बीघा में पचास हजार की आवक होने से परिवार को अच्छी तरह से गुजारा हो जाता है। पिछले वर्ष कपास के ऊंचे दाम मिले थे।