
Ahmedabad. केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को गांधीनगर में गुजरात बायोटेक्नॉलोजी रिसर्च सेंटर (जीबीआरसी) की बीएसएल-4 बायो-कंटेनमेंट फैसिलिटी की नींव रखी। उन्होंने कहा कि पुणे की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआइवी) के बाद यह भारत की दूसरी उच्च स्तरीय लैब होगी वहीं किसी राज्य सरकार की ओर से बनाई जा रही यह पहली लैब है। 140 करोड़ की आबादी में अब तक देश में केवल एक ही बीएसएल-4 लैब पुणे में थी, जिसकी वजह से सैकड़ों किलोमीटर दूर सैंपल भेजना पड़ता था। लेकिन नई बन रही लैब से हमें बड़ा फायदा होगा। 11 हजार वर्ग मीटर के विशाल कॉम्प्लेक्स में 362 करोड़ की लागत से देश की जैविक सुरक्षा का एक मजबूत किला बनने जा रहा है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और विज्ञान व तकनीक मंत्री अर्जुन मोढ़वाडिया की मौजूदगी में शाह ने कहा कि दुनिया भर की बीएसएल लैब का अध्ययन कर बीएसएल-4 बायो-कंटेनमेंट फैसिलिटी तैयार की जा रही है। यहां पशुओं से होकर मानव तक पहुंचने वाले रोगों का भी अध्ययन करने की विश्वस्तरीय व्यवस्था होगी।
उन्होंने कहा कि एक अध्ययन के अनुसार 60 से 70 प्रतिशत बीमारियां पशुओं से होकर इंसान तक पहुंचती हैं, इसलिए भारत ने वन हेल्थ मिशन के माध्यम से मानव और पशु दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का कार्यक्रम शुरू किया है। अब हमारे वैज्ञानिकों को खतरनाक वायरस के सैंपल जांचने के लिए विदेश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। विदेश पर निर्भरता खत्म होने से जांच में तेजी आएगी और हम आत्मनिर्भर बनेंगे। बीएसएल-4 सभी जरूरतों की पूर्ति करेगी। हमें रिसर्च-बेस्ड परमानेंट सुरक्षा की दरकार है।
शाह ने कहा कि जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट में 10 हजार से ज्यादा व्यक्तियों के जीनोम सीक्वेंसिंग को हमने स्टोर कर लिया है जो हमारे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। गुजरात बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आज देश के शीर्ष पांच राज्यों में है। जब बीएसएल-4 फैसिलिटी शुरू हो जाएगी, तब गुजरात इसमें पहले स्थान पर होगा। बायोटेक पॉलिसी के तहत 20 हजार करोड़ के निवेश और 1 लाख रोजगार का लक्ष्य रखा है। मेगा प्रोजेक्ट्स के लिए विशेष सहायता घोषित की है।
गृह मंत्री ने कहा कि एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति विकसित हो रही प्रतिरोधकता हमारी सोसाइटी और पूरी मानवजाति के सामने बहुत बड़ा खतरा है। यह एक ‘साइलेंट डिजास्टर’ की तरह है। एंटी माइक्रोबियल रेसिस्टेंस (एएमआर) पूरे समाज के लिए बहुत बड़ा संकट है। आने वाले दिनों में और आने वाली पीढ़ियों के लिए फर्टाइल ट्रांसमिशन का कारण भी बनता है। एएमआर से निपटने के लिए स्पष्ट रोडमैप, सही समय पर उपचार व अंतिम व्यक्ति तक जागरूकता पहुंचाना जरूरी है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 2014 में भारत की बायो इकोनॉमी 10 बिलियन डॉलर की थी और वित्तीय वर्ष 2024 के समाप्त होने तक यह 166 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है। 2014 में बायोटेक क्षेत्र में काम करने वाले स्टार्टअप की संख्या 500 से कम थी, जो 2025 में बढ़कर 10 हजार से अधिक हो चुकी है। इस अवधि में बायो इंक्यूबेटर की संख्या 6 से बढ़कर 95 हो गई। वहीं 125 पेटेंट फाइलिंग की जगह हम 1300 तक पहुंच चुके हैं।
Published on:
13 Jan 2026 09:54 pm
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