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दिवाली पर बुजुर्गों को ठगने से पहले धरा गया महाराष्ट्र का नामी चेन स्नेचर

दिसंबर में एक ही दिन में नकली पुलिस बन छह से ठगी,महाराष्ट्र के टॉप-20 चेन स्नेचरों में हैं शामिल

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bilal jafari

दिवाली पर बुजुर्गों को ठगने से पहले धरा गया महाराष्ट्र का नामी चेन स्नेचर

अहमदाबाद. महाराष्ट्र में आतंक मचाने के बाद गुजरात में दिवाली के दौरान बुजुर्ग महिलाओं को ठगने अहमदाबाद पहुंचे ईरानी गिरोह के नामी चेन स्नेचर बिबाल उर्फ मोटा जाफरी (ईरानी) (30) को क्राइम ब्रांच ने रेलवे स्टेशन के पास से धर दबोचा है। आरोपी महाराष्ट्र के टॉप-20 चेन स्नेचरों में से है। दिसंबर-२०१७ में अहमदाबाद में नकली पुलिस बनकर एक ही दिन में छह बुजुर्ग महिलाओं से आभूषण ठगने के आरोप में वांछित था। गिरोह के अन्य सदस्यों में उसके ससुर का नाम खुला है। एक साल में गुजरात, म.प्र., उत्तर प्रदेश में 11 लोगों को खुलासा का खुलासा हुआ है।
क्राइम ब्रांच एसीपी बी.वी.गोहिल ने बताया कि बिलाल महाराष्ट्र के कल्याण जिले में आंबीवली ईस्ट का रहने वाला है फिलहाल म.प्र.के होशंगाबाद जिले के पिपरिया में अपने ससुराल में रह रहा था। वो मुंबई व महाराष्ट्र के टॉप-20 चेन स्नेचरों में से एक है। उस पर 20 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। मकोका के तहत जेल भी जा चुका है। दस साल पहले कल्याण पुलिस स्टेशन में पकड़ा जा चुका है।
इस पर अहमदाबाद के घाटलोडिया, नारणपुरा, सेटेलाइट, नारणपुरा और आनंदनगर, गुजरात यूनिवर्सिटी थाना इलाके में 24 दिसंबर २०१७ को एक ही दिन में छह बुजुर्ग महिलाओं से उनके आभूषण ठगने का आरोप है। आरोपी ईरानी गैंग का मुखिया है। यह चार से पांच लोगों के साथ अहमदाबाद में आया था। इसमें लिप्तता सामने आने पर उसकी तलाश थी। इस बीच खबर मिली कि वो दिवाली के दौरान फिर से अहमदाबाद में सक्रिय होने वाला है। जिससे पीआई आर.एस.सुवेरा, पीएसआई वी.एम.गोहिल, वाई.जी.गुर्जर और आर.जे.चौधरी की टीम बनाकर इसके पीछे लगाई। इसके अहमदाबाद पहुंचते ही इसे रेलवे स्टेशन के पास से धर दबोचा। इसके अन्य सदस्य वांछित हैं।
इसके गिरोह में पांच से छह सदस्य हंै, जिसमें होशंगाबाद पिपरिया निवासी उसका ससुर भी शामिल है। आरोपी ने अन्य सथियों के साथ मिलकर अहमदाबाद के अलावा एक ही साल में उ.प्र. के कानपुर, लखनऊ, इलाहाबाद में और म.प्र. के भोपाल में भी ठगी की होने का आरोप कबूला है।
आगे हत्या हुई है पुलिस जांच चल रही है कहकर उतरवाते गहने
गोहिल ने बताया कि ईरानी गिरोह के सदस्य खुद को पुलिस कर्मी बताते। आगे हत्या हुई है कहकर और पुलिस जांच चल रही है कहकर अकेले गुजरने वाली बुजुर्ग महिलाओं को रोकते। उनसे उनके आभूषण उतारकर रखने के लिए कहते और फिर उन्हें उतारकर रखने में मदद करने के बहाने से आभूषण लेकर रूमाल में बांध देते और असली आभूषण वाला रूमाल का पैकेट रखकर उसकी जगह नकली आभूषण वाला पैकेट देकर फरार हो जाते। विश्वास जीतने के लिए इनके ही एक साथी को भी वृद्धा को रोकने के दौरान रोकते और उससे भी उसकी सोने की चेन, अंगूठी उतरवाते ताकि उसे भरोसा हो। एक साथी बाइक पर दूर खड़ा रहता और कुछ अन्य साथी दूर कार में भी खड़े रहते। काम होते ही बाइक और कार से फरार हो जाते।