
साइक्लोट्रॉन प्रोजेक्ट फॉर न्यूक्लियर मेडिसीन अगले डेढ़ वर्ष में होगी कार्यरत
अहमदाबाद. शहर के सिविल मेडिसिटी कैंपस स्थित गुजरात कैंसर एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (जीसीआरआई) में साइक्लॉट्रोन प्रोजेक्ट फॉर न्यूक्लियर मेडिसिन की इकाई अगले डेढ वर्ष में कार्यरत हो जाएगी। इसके अलावा प्रोटॉन बीम थेरैपी की मशीन भी जल्द शुरू हो जाएगी।
जीसीआरआई के निदेशक डॉ. शशांक पंड्या ने बताया कि गुजरात विधानसभा में शुक्रवार को पेश किए गए बजट में कैंसर रोगियों को ध्यान में रखकर घोषणा की गई है। साइक्लोट्रॉन प्रोजेक्ट फॉर न्यूक्लियर मेडिसिन की इकाई की स्थापना से मरीजों को काफी लाभ होगा। कैंसर के निदान और उपचार करने वाली मशीनों में बाहर से आने वाली सामग्री विदेश से आती है। साइक्लोट्रॉन प्रोजेक्ट से यह सामग्री यहीं बनने लगेगी। उन्होंने कहा कि संभव: आगामी एक से डेढ़ वर्ष में यह सुविधा जीसीआरआई में होगी। जीसीआरआई में शुरू होने के बाद उपचार व निदान का खर्च काफी कम हो जाएगा।
प्रोटॉन बीम थेरैपी की भारत में होगी तीसरी मशीन
डॉ. शशांक पंड्या ने कहा कि बजट में प्रोटॉन बीम थेरैपी मशीन की भी घोषणा की गई है। उन्होंने कहा कि इस तरह की मशीन अब तक भारत में दो ही जगहों पर है। जीसीआरआई में यह तीसरी होगी। कैंसर के गंभीर मरीजों के लिए इससे रेडिएशन थेरेपी हो सकेगी।
Published on:
02 Feb 2024 10:04 pm
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