
जामनगर. पाकिस्तान की जेल में गुजरात के गिर सोमनाथ जिले की उना तहसील के सोखडा गांव के एक मछुआरे की बीमारी के कारण मौत हो गई। समाचार मिलने पर मृतक के परिजनों में शोक व्याप्त हो गया।
सोखड़ा गांव के निवासी मछुआरे बाबू चुडासमा की तबीयत पाकिस्तान की जेल में 23 जनवरी को सुबह अचानक बिगड़ गई और सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। उनके साथ मौजूद अन्य कैदियों ने उन्हें तुरंत जेल के अस्पताल में भर्ती कराया। वहां से एंबुलेंस से शहर के अस्पताल ले जाया गया। रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। इसके बाद शव को जेल ले जाया गया।
जेल में सभी बंदी भारतीय मछुआरों ने मौन रखा। सोशल मीडिया पर एक पत्र वायरल हुआ जिसमें कहा गया कि बाबू चुडासमा का शव समय पर घर पहुंचेगा। इसके बाद मृतक के परिजनों में शोक की लहर दौड़ गई। बाबू पिछले चार वर्षों से पाकिस्तान की जेल में बंद थे। उनकी सजा पूरी हो चुकी थी, लेकिन वह अभी भी पाकिस्तान की जेल में बंद थे।
पाकिस्तान की जेल में कैद एक भारतीय मछुआरे की ओर से युवक सूरज को भेजे गए पत्र में लिखा कि 23 जनवरी को लाडी जेल में बंद बाबू चुडासमा को कोई बीमारी नहीं थी, सुबह 4.30 बजे उन्हें अचानक सांस लेने में दिक्कत और सीने में दर्द हुआ। उन्हें जेल के अंदर ही अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत बिगड़ने लगी तो अस्पताल के लिए एंबुलेंस बुलाई गई और सुबह 5 बजे रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। मृतक के शव को जेल में लाया गया तो सभी भारतीय मछुआरों ने उनके अंतिम दर्शन किए और मौन व्रत रखा। पत्र में लिखा कि बाबू का पार्थिव शरीर समय पर पहुंच जाएगा। यह पत्र 31 जनवरी को लिखा गया था और सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
गौरतलब है कि पिछले 2 सालों में पाकिस्तान की जेलों में 4 भारतीय मछुआरों की मौत हो चुकी है। पाकिस्तान की ओर से अपहृत 217 में से 189 मछुआरे अपनी सजा पूरी कर चुके हैं। दूतावास से मछुआरों का सत्यापन न होने के कारण वे अब भी पाकिस्तानी जेलों में बंद हैं। सत्यापन में देरी के कारण, सजा पूरी होने के बाद भी उन्हें जेल से रिहा नहीं किया जा रहा।
Published on:
05 Feb 2025 10:28 pm
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