गांधीनगर. ठेका प्रथा रद्द करने की मांग को लेकर बुधवार को आशावर्करों ने गांधीनगर में हल्लाबोल किया। महिला शक्ति सेना के बैनर तले आशावर्कर सत्याग्रह छावनी पर एकत्रित हुई। चन्द्रिकाबेन सोलंकी की अगुवाई में ये आशावर्कर सत्याग्रह छावनी पर धरना-प्रदर्शन करने वाली थी, लेकिन वहां पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था थी। इसके चलते आशावर्कर पथिक आश्रम एसटी बस अड्डा के निकट एकत्रित हो गई। बाद में हाथों में बैनर-पोस्टर लहराते हुए आशावर्करों ने सचिवालय की ओर से रुख किया तो महिला पुलिसकर्मियों ने इन आशावर्कर को रोकने की कोशिश की। जहां पुलिसकर्मियों और आशावर्कर के बीच झड़प हुई।
आशावर्कर ने ठेका प्रथा रद्द करने समेत अपनी मांगों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। पुलिसकर्मियों ने इन आशावर्कर को रोकने के लिए पुलिस वैन और बैरीकेड लगाए थे। इसके बावजूद भी कई आशावर्कर रैली लेकर विधानसभा के सामने तक पहुंच गई, जहां कई आशावर्कर को महिला पुलिसकर्मियों ने हिरासत में लिया। ये आशावर्कर फिक्स वेतन की मांग को लेकर अड़ी हुई हैं। राज्य में आशा वर्कर और आशा फेसिलेटर कार्यकर्ताओं से कोरोना महामारी में वैक्सीनेशन, टेस्टिंग, सर्वे समेत कार्रवाई कराई गई।
ये हैं आशावर्कर की मांगें
आशावर्कर एवं आशा फेसिलेटर चतुर्थी श्रेणी का महकमा गठित करने और स्थायी करने, सातवें वेतन आयोग के मुताबिक न्यूनतम वेतन भुगतान करने की मांग कर रही है। इसके अलावा प्रोत्साहन राशि, मानद् वेतन, ठेका प्रथा रद्द करने की मांग की रही है। 40 वर्ष की आयु पार करने वाली आशावर्कर और फेसिलेटर को पेशन देने औ्र पहचान पत्र देने की मांग भी कर रही हैं। यूनिफार्म के तौर पर साड़ी दी जाए। महिला स्वास्थ्य वर्कर के प्रशिक्षण में अनुभवी आशा वर्कर और आशा फेसिलेटर को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।