
आणंद. ओड दंगा प्रकरण को लेकर गुजरात उच्च न्यायालय के अपील याचिकाओं पर फैसला सुनाए जाने को लेकर शुक्रवार को ओड गांव में सन्नाटा पसरा था। गांव के लोग फैसला का समाचार सुनने के लिए टेलीविजन सेट के सामने बैठ गए थे। 14 दोषियों को उम्र कैद की सजा सुनाए के बाद ही गांव में तनाव पूर्ण सन्नाटा पसर गया। यहां के पीरावाली भागोळ, सुरीवाली भागोळ, मलाव भागोळ, बाजार इलाके, बस स्टैण्ड जैसे इलाकों में तनाव पूर्ण शांति जैसी स्थिति देखी गई।
पत्रिका ने ओड गांव के दौरे पर पत्रिका ने पाया कि सूनसान की स्थिति के कारण लोग घर के बाहर नहीं दिखे। बाजार इलाके में कुछेक लोगों की चहल-पहल देखी गई। लोगों से इस प्रकरण के फैसले पर प्रतिक्रिया की बात पर लोग दूर भागते दिखे। वहीं पीडि़त सफीमियां मलेक व मोहम्मद खान पठाण के घर भी नीरव शांति दिखी।
उधर संजय रावजीभाई पटेल ने बताया कि उनके चाचा की उम्र कैद की सजा बरकरार रखी है, इससे उनके परिजन काफी दुखी हैं। हालांकि उन्होंने उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत किया और कहा कि इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे।
दोषियों को फांसी मिलने पर ही सच्चा न्याय मिलता
आणंद. गोधरा कांड के बाद शहर के ओड स्थित पीरावाली भागोळ में भडक़े दंगों में 23 जनों को जिंदा जलाए जाने के मामले में अपने परिवार के 7 सदस्यों को गंवाने वाले मोहम्मद खान अकबरखान पठाण ने कहा कि दोषियों को यदि फांसी मिलती तो वह सच्चा न्याय होता।
गुजरात उच्च न्यायालय के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि इस घटना को याद आते ही बरबस उनकी आंखों से आंसू निकल आते हैं। 16 वर्ष के बाद भी उच्च न्यायालय के 14 आरोपियों की उम्र कैद तथा 5 आरोपियों की सात वर्ष की सजा से उन्हें संतोष नहीं है। उनका कहना है कि इन दोषियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए।
वहीं एक अन्य पीडि़त व इस दंगेे में अपने छह परिजनों को गंवाने वाले सफी मियां मलेक ने उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि दोषियों को फांसी की सजा होनी चाहिए थी। साथ ही जो बरी हो गए उन्हें भी सजा दी जानी चाहिए थी। इस मामले में राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए।
Published on:
11 May 2018 10:05 pm
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