
राजकोट. सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र की वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (वीजीआरसी) के तहत सोमवार को राजकोट में ‘सौराष्ट्र इकोनॉमिक रीजन-इकोनॉमिक मास्टर प्लान विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया।
मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल मौजूद थे। उन्होंने कहा कि 2047 तक सौराष्ट्र का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 11 से 12 गुना बढ़कर 600 बिलियन डॉलर पहुंचेगा।
30 वर्षों के दीर्घकालिक इकोनॉमिक मास्टर प्लान तैयार
उन्होंने सौराष्ट्र के विकास के लिए तैयार किए गए 30 वर्षों के दीर्घकालिक इकोनॉमिक मास्टर प्लान की जानकारी दी। गोयल ने कहा कि इसके तहत राजकोट में इंजीनियरिंग और मेडिकल डिवाइस पार्क तथा जामनगर में पेट्रोकेमिकल्स जैसे विशिष्ट क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है।
सोमवार को एमएसएमई कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। इस कॉन्क्लेव में सौराष्ट्र एवं कच्छ के औद्योगिक विकास के लिए 300 करोड़ रुपए से अधिक के एमओयू किए गए। प्रारंभ में केन्द्रीय मंत्री गोयल ने कहा कि विकसित भारत@2047 के सपने को साकार करने के लिए विकसित गुजरात अनिवार्य है। गुजरात सरकार ने लगभग 60 लाख करोड़ रुपए का विशाल इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने का विकास आयोजन किया है। इस आयोजन से गुजरात ग्रोथ इंजन बनेगा।
वाइब्रेंट गुजरात रीजनल एग्जीबिशन (वीजीआरइ) 15 जनवरी तक खुली रहेगी। इसमें 160 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमइ), 60 स्टार्टअप्स, 62 कारीगरों और केंद्र एवं राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के 70 स्टॉल शामिल हैं। छह डोम और 26,400 वर्गमीटर के कुल क्षेत्र में फैली वीजीआरइ बिजनेस नेटवर्किंग और सहयोग के केंद्र के रूप में उभरी है। दो दिनों के दौरान 50 से अधिक क्षेत्र-केंद्रित सेमिनार और विषयों के सत्र आयोजित किए गए। इनमें उद्योगों, कृषि, मत्स्य पालन, पर्यटन, पर्यावरण, स्टार्टअप्स, सस्टेनेबिलिटी और भविष्य की तकनीकों का समावेश किया गया।
सोमवार को रिवर्स बायर्स सेलर्स मीट आकर्षण का केंद्र बन गई। यहां 500 करोड़ रुपए के निर्यात को लेकर बिजनेस इंक्वायरी हुई। भारत से विभिन्न मैन्युफैक्चरर्स से वस्तुएं खरीदने के लिए 23 देशों से 53 अंतरराष्ट्रीय खरीदार आए। अपने उत्पाद बेचने के लिए पूरे राज्य से 1800 से अधिक मैन्युफैक्चरर्स यहां पहुंचे।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन के अपर महानिदेशक सुविध शाह के अनुसार, इस मीट के जरिए स्थानीय उत्पादकों को अपने उत्पादन सीधे विदेश में बेचने का एक बड़ा प्लेटफॉर्म मिला है। खरीदारों और विक्रेताओं के बीच 2200 से अधिक बैठकें हुई, दो दिनों में 1000 से अधिक समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए।
Published on:
12 Jan 2026 09:46 pm
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