
इस वर्ष 18700 गर्भवती महिलाओं को मच्छरदानी का वितरण
वडोदरा. जिले में वर्ष 2016 में मलेरिया के 536, 2017 में 409, 2018 में 199 मामले दर्ज किए गए। मलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत वर्ष 2019 में 75 और जिला स्वास्थ्य विभाग की कड़ी मेहनत के कारण वर्ष 2020 में केवल 31 मामले सामने आए हैं।
जून महीने को मलेरिया माह के तौर पर मनाया जा रहा है। इसके तहत आगामी मानसून के दौरान मच्छर जनित बीमारियों को रोकने के लिए जिला मलेरिया अधिकारी की ओर से एहतियाती कदम उठाए हैं, साथ ही लोगों में बीमारी को फैलने से रोकने के लिए एहतियाती उपाय करने के साथ ही लोगों को जागरूकता भी किया गया है।
मलेरिया के साथ-साथ डेंगू और चिकनगुनिया जैसी अन्य वेक्टर जनित बीमारियों को रोकने के लिए कड़ी निगरानी की जा रही है। मलेरिया से बचाव के लिए घर में पानी के बर्तन कोठी, टंकी, डिब्बे, फूलदान, पक्षी कुंडे को एयरटाइट ढक्कन से ढककर रखना और सप्ताह में एक बार घिसकर साफ करना चाहिए। रुके हुए पानी को बहा देना, रात को सोते समय विशेष तौर पर बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करना चाहिए। शाम के समय घर के खिडक़ी-दरवाजे बंद रखने चाहिए।
जिले के स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी गांवों में निगरानी की व्यवस्था की गई है। वर्ष 2021 के दौरान 15,600 गर्भवती महिलाओं को दवायुक्त मच्छरदानी का वितरण किया गया है। साथ ही ग्रामीण स्तर पर मलेरिया की रोकथाम के लिए 55 हजार पत्रक बांटकर प्रचार-प्रसार की योजना बनाई है।
जिले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से तहसील स्वास्थ्य अधिकारियों, चिकित्सा अधिकारियों, तालुका पर्यवेक्षकों, बहुउद्देश्यीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और आशा कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर कोविड की महामारी को नियंत्रित करने के साथ वाहक जन्य रोग को रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
इस कार्रवाई के तहत स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर जाकर बुखार के मामलों का पता लगा रहे हैं, मच्छरों के स्थलों का सर्वेक्षण कर रहे हैं, रोकथाम के प्रयास कर रहे हैं और बैनर, पोस्टर, पत्रक वितरण के माध्यम से जनजागृति लाने को स्वास्थ्य शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। किसी भी गांव में मलेरिया का कोई मामला सामने आने पर तत्काल निगरानी, नियंत्रण कार्रवाई और फॉगिंग का कार्य किया जाता है।
राज्य सरकार ने 2022 तक मलेरिया उन्मूलन के लिए चलाया अभियान
संचारी रोग (कम्युनिकेबल डिजीज) के तहत राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (नेशनल वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल कार्यक्रम-एनवीबीडीसीपी) के तहत राज्य सरकार की ओर से 2022 तक मलेरिया उन्मूलन के लिए अभियान चलाया गया है।
रक्त परीक्षण और उपचार करवाना करवाना जरूरी
मलेरिया वेक्टर जनित रोग है, जो एनोफिलीस मादा मच्छरों से फैलत है। यह मच्छर घर के बाहर जमा पानी में पैदा होता है और रात में काटता है। मलेरिया रोग में सर्दी-जुकाम, बुखार, सिर दर्द, झुनझुनी, जी मिचलाना और उल्टी होने की स्थिति में समीप के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य कार्यकर्ता से संपर्क कर रक्त परीक्षण और उपचार करवाना चाहिए।
Published on:
08 Jun 2021 12:38 am

