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गुजरात के समुद्र तटीय क्षेत्र में 680 से अधिक डॉल्फिन

गांधीनगर. वन्यजीवों के साथ-साथ सबसे सुंदर एवं आकर्षक जलचर जीव डॉल्फिन के संरक्षण-संवर्धन में गुजरात ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि 2025 की अंतिम गणना के अनुसार गुजरात के 4,087 वर्ग किलोमीटर में फैले समुद्री क्षेत्र में लगभग 680 से अधिक डॉल्फिन की उपस्थिति दर्ज हुई।

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Over 680 Dolphins in Gujarat's Coastal areas

डॉल्फिन का फाइल फोटो

डॉल्फिन संरक्षण में गुजरात का योगदान अहम- शिवराजपुर, पोशित्रा डॉल्फिन साइट के लिए बेस्ट स्पॉट

गांधीनगर. वन्यजीवों के साथ-साथ सबसे सुंदर एवं आकर्षक जलचर जीव डॉल्फिन के संरक्षण-संवर्धन में गुजरात ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि 2025 की अंतिम गणना के अनुसार गुजरात के 4,087 वर्ग किलोमीटर में फैले समुद्री क्षेत्र में लगभग 680 से अधिक डॉल्फिन की उपस्थिति दर्ज हुई। जलचर एवं वन्यजीव संरक्षण तथा संवर्धन के विशेष प्रयासों के परिणामस्वरूप जलचर एवं वन्यजीव पर्यटन क्षेत्र में भी गुजरात ने लंबी छलांग लगाई। राज्य के पर्यटन स्थलों शिवराजपुर तथा पोशित्रा का समुद्र तट डॉल्फिन के लिए ‘बेस्ट स्पॉट’ के रूप में भी जाना जाता है। यहां पानी स्वच्छ होने के कारण डॉल्फिन सरलता से दिखाई देती हैं।
मोढवाडिया ने कहा कि गुजरात में वन विभाग ने पिछले 12 वर्षों में समुद्र तट पर मैंग्रोव के साथ-साथ जलचर जीवों के संरक्षण तथा उनके आवास-विकास के लिए अनेक प्रकार के संयुक्त प्रयास शुरू किए। कच्छ की खाड़ी के दक्षिणी भाग में स्थित मरीन नेशनल पार्क तथा मरीन सैंचुरी के ओखा से नवलखी तक फैले 1,384 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में सर्वाधिक 498 डॉल्फिन होने की संभावना है। कच्छ की खाड़ी के उत्तरी भाग में कच्छ वृत्त के तहत 1,821 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 168, भावनगर के 494 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 10 तथा मोरबी के 388 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 4 डॉल्फिन देखी गई। कच्छ की खाड़ी में स्थित भारत का यह प्रथम समुद्री राष्ट्रीय उद्यान डॉल्फिन का मुख्य घर है।
उन्होंने कहा के स्वस्थ इकोसिस्टम के लिए डॉल्फिन बहुत ही महत्वपूर्ण जलचर प्राणी है। समुद्री स्तनधारी प्राणियों के कुछ शीर्ष शिकारी खाद्य श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और समुद्री इकोसिस्टम में संतुलन सुनिश्चित करने में भी सहायता करते हैं। इन डॉल्फिनों को बचाने में कच्छ से भावनगर तक समुद्र में मछली पकड़ने का कार्य करने वाले मछुआरों का योगदान भी महत्वपूर्ण है। इन प्रयासों के चलते गुजरात के समुद्र तट पर दिखाई देने वाली डॉल्फिन देश-विदेश के पर्यटकों के लिए नया आकर्षण केन्द्र बनी हैं। डॉल्फिन लुप्तप्राय प्रजातियों में शामिल होने के कारण उनका शिकार करना या उन्हें नुकसान पहुंचाना गैर-जमानती अपराध है।

दो प्रकार की डॉल्फिन सबसे अधिक

गुजरात के समुद्री क्षेत्र में मुख्यतः इंडो-पैसिफिक हम्पबैक डॉल्फिन तथा बॉटलनोज डॉल्फिन, इन दो प्रकार की डॉल्फिन सबसे अधिक दिखाई देती हैं। हम्पबैक डॉल्फिन अधिकतर अरब सागर में पाई जाती हैं। इसे इसकी विशिष्ट कूबड़ और विस्तारित पूंछ से पहचाना जा सकता है। डॉल्फिन अपने मैत्रीपूर्ण एवं जिज्ञासु स्वभाव के लिए जानी जाती है। कई बार लहरों में उछलती-कूदती और खेलती हुई दिखाई देती है, जो पर्यटकों को अपने एक्रोबैटिक प्रदर्शन से आनंदित करती है। इसका शरीर आकर्षक तथा इसके मुंह का आकार बोतल जैसा होने के कारण इसे आसानी से पहचाना जा सकता है। इनका मुख्य भोजन मछलियां, केकड़े और झींगे हैं। हम्पबैक डॉल्फिन सामान्यतः 2.5 से 3.2 मीटर लंबी होती है और इसका वजन 150 से 250 किलोग्राम तक हो सकता है। स्तनधारी प्राणी होने के कारण फेफड़ों से श्वास लेती है। इसलिए वह हर कुछ मिनट में पानी की सतह पर सिर बाहर निकालकर सांस लेने के लिए आती है।