
नई दिल्ली में सम्मान प्राप्त करते वटवा के वरिष्ठ मण्डल मैकेनिकल इंजीनियर अशोक कुमार।
अहमदाबाद. पश्चिम रेलवे के अहमदाबाद मंडल स्थित वटवा इलेक्ट्रिक लोको शेड को नई दिल्ली में सीआइआइ ग्रीनको गोल्ड रेटिंग से सम्मानित किया गया। कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआइआइ)- ग्रीन बिजनेस सेंटर (जीबीसी) द्वारा यह सम्मान वटवा के वरिष्ठ मण्डल मैकेनिकल इंजीनियर अशोक कुमार को यह सम्मान प्रदान किया गया।
अहमदाबाद के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) वेद प्रकाश ने कहा कि पर्यावरणीय उत्कृष्टता और सतत विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए वटवा इलेक्ट्रिक लोको शेड को प्राप्त सीआइआइ ग्रीनको गोल्ड रेटिंग पश्चिम रेलवे में पहली बार अहमदाबाद मंडल प्राप्त हुई। वटवा शेड ने नवाचार, संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और हरित प्रौद्योगिकियों को अपनाकर यह सिद्ध किया है कि उत्कृष्ट परिचालन और पर्यावरणीय जिम्मेदारी साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।
डीआरएम ने कहा कि भारतीय रेल वर्ष 2030 तक नेट ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य लेकर कार्य कर रही है और यह उपलब्धि उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ग्रीनको रेटिंग भारत की अपनी तरह की पहली ऐसी मूल्यांकन प्रणाली है, जो किसी संस्थान के पर्यावरणीय प्रदर्शन का आकलन करती है। इसके तहत ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, अपशिष्ट प्रबंधन, सामग्री संरक्षण एवं पुनर्चक्रण, हरित आपूर्ति श्रृंखला, हरित अवसंरचना एवं पारिस्थितिकी तथा पर्यावरणीय नवाचार जैसे विभिन्न मानकों का मूल्यांकन किया जाता है। गोल्ड रेटिंग इस प्रणाली के अंतर्गत प्रदान किए जाने वाले सर्वोच्च सम्मान में से एक है।
उन्होंने बताया कि वटवा इलेक्ट्रिक लोको शेड ने पूर्णतः इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन के जरिए 2022-23 में 1.88 करोड़ लीटर से अधिक डीजल की खपत बंद की। असेंबली बे में लॉन्ग-ट्यूब डेलाइट हार्वेस्टिंगप्रणाली स्थापित की गई। 5-स्टार रेटेड पंखे, एलईडी लाइटें, ऑक्यूपेंसी सेंसर तथा एस्ट्रोनॉमिकल टाइमर का उपयोग कर ऊर्जा बचत सुनिश्चित की गई। प्रतिवर्ष लगभग 20.5 लाख लीटर जल पुनर्भरण की क्षमता विकसित की गई। जलरहित यूरिनल की व्यवस्था के माध्यम से जल संरक्षण एवं लोको पायलटों की स्वच्छता सुनिश्चित की गई। रूफटॉप सौर परियोजना भी प्रस्तावित है। ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की तीव्रता में निरंतर कमी दर्ज की गई। स्रोत स्तर पर अपशिष्ट पृथक्करण, अधिकृत पुनर्चक्रण एजेंसियों के माध्यम से निस्तारण तथा प्रमाणित प्रबंधन प्रणालियों का क्रियान्वयन किया गया। वार्षिक औसत खपत (एएसी) की समीक्षा एवं पुर्जों के पुनः उपयोग के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 38 लाख रुपए की बचत सुनिश्चित की गई। ग्रीन प्रमाणित विक्रेताओं से खरीद, पैकेजिंग में एकल-उपयोग, प्लास्टिक पर प्रतिबंध तथा पैकिंग अपशिष्ट वापसी जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।
Published on:
20 Jun 2026 09:52 pm
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