
वडोदरा के निजामपुरा स्थित नारी संरक्षण गृह।
राजेश भटनागर/जफर सैयद
अहमदाबाद/वडोदरा. कुछ बेटियों को अनाथ बनकर मजबूरी के चलते अभिभावकों से दूर रहना पड़ता है। ऐसी बेटियों के लग्न का बीड़ा गुजरात सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से उठाया जा रहा है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के अधीन वडोदरा के निजामपुरा स्थित नारी संरक्षण गृह में शहनाई-ढोल वादन की तैयारी की जा रही है। समाज की बेटियों (गामगगी) वंदना व शीतल के विवाह में कन्यादान के लिए 17 तक आवेदन मांगे गए हैं। शीतल अतुल पवार की मां के निधन के बाद पिता कहीं चले गए, बाद में शीतल को कुछ रिश्तेदार नारी संरक्षण गृह में छोड़ गए। कुदरत की ओर से पैदा की गई इस प्रकार की कठिन परिस्थिति में राज्य सरकार की ओर से शीतल का लालन-पालन किया गया और उसका बचपन हंसते-खेलते बीता।
इसी प्रकार वंदना को भी आठ वर्ष की आयु में नारी संरक्षण गृह में पहुंचाया गया। पुलिस की ओर से काफी खोजबीन करने के बावजूद वंदना के अभिभावक नहीं मिले। नारी संरक्षण गृह में उसके माता और पिता की भूमिका निभाई गई। शीतल और वंदना को अध्ययन के साथ-साथ आदर्श नारी बनाने के लिए संस्कारित किया गया। अब दोनों के लग्न की तैयारियां की जा रही हैं।
एक पिता की भांति जिम्मेदारी निभाते हुए करते हैं युवक का चयन
नारी संरक्षण गृह में रहने वाली ऐसी युवतियों के विधि के अनुसार लग्न कराया जा रहा है। लग्न के इच्छुक युवकों के बायोडाटा आते भी हैं और मंगवाए भी जाते हैंं। बायोडाटा देखकर घर का मकान, अच्छी कमाई, अच्छा पारिवारिक माहौल वाले लायक उम्मीदवारों का प्राथमिक चयन एक पिता की भांति जिम्मेदारी निभाते हुए नारी संरक्षण गृह की ओर से किया जाता है। उसके बाद युवक-युवती की मुलाकात करवाई जाती है और पसंद आने पर युवती की लिखित सहमति लेते हैं।
जांच रिपोर्ट के बाद कलक्टर व विभाग की मंजूरी आवश्यक
लग्न लायक युवक को पसंद करने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से युवक की सामाजिक-आर्थिक जांच कर रिपोर्ट तैयार की जाती है। इनके अलावा मेडिकल व पुलिस रिपोर्ट भी ली जाती है। सभी रिपोर्ट अच्छी आने पर कलक्टर की मंजूरी लेकर गांधीनगर स्थित महिला एवं बाल विकास विभाग की सहमति ली जाती है। इसके बाद विवाह की तिथि तय होती है।
लोकाचार का पालन, धार्मिक विधि से लग्न
लोकाचार के पालन के साथ सांजी के गीत, पीठी, गोत्रज, माणेक स्तंभ रोपण आदि धार्मिक विधि की जाती है। लग्न में नारी संरक्षण गृह की सभी बच्चियां भी मौजूद रहती हैं। हालांकि विवाह समारोह आयोजित नहीं किया जाता लेकिन युवक के परिजनों की इच्छा पर विवाह समारोह भी आयोजित किए जाते हैं। वंदना व शीतल के विवाह में कन्यादान और मामेरे के इच्छुक लोगों से आगामी 17 फरवरी तक आवेदन मंगवाए गए हैं।
अनाथ बच्चियों के लालन-पालन की जिम्मेदारी समाज की
अनाथ बच्चियों के लालन-पालन की जिम्मेदारी समाज की है। यह भारतीय प्राचीन परंपरा भी है। नारी संरक्षण गृह भी अवसर मिलने पर इस कार्य में मदद करता है।
- माधवी चौहान, महिला एवं बाल विकास अधिकारी, वडोदरा।
Published on:
14 Feb 2022 10:48 pm
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