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७० युवकों ने उठाया गरीब बच्चों को पढ़ाने का बीड़ा

गरीब बच्चों को पढ़ाने जाते हैं झोपड़पट्टी क्षेत्रों में, युवा पहल बनी मिसाल, प्रत्येक रविवार को झोपड़पट्टी में जाते हैं पढ़ाने के लिए

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७० युवकों ने उठाया गरीब बच्चों को पढ़ाने का बीड़ा

आणंद. आज के युग में शिक्षा महंगी होने के कारण गरीब एवं मध्यवर्गीय परिवारों के लिए बालकों को शिक्षा दिलाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में आणंद वल्लभविद्यानगर के विभिन्न कॉलेजों में पढऩे वाले छात्र एवं सामाजिक कार्य करने वाले युवकों ने गरीब बच्चों को पढ़ाने का बीड़ा उठाया है। सभी युवक प्रत्येक रविवार झोपड़पट्टियों में गरीबों बच्चों को घर जाकर पढ़ाते हैं। युवकों के इस शिक्षा कार्य के चलते बच्चों के चेहरे पर उच्च शिक्षा प्राप्त करने की आशा की किरण दिखने लगी है।
आज चारों को लगता है कि शिक्षा का व्यापारीकरण हो रहा है, ऐसे समय में बालकों को अच्छी शिक्षा मिलना एक सपने के समान है। ऐसे में युवा एकता समिति के अध्यक्ष मयूर सुथार व उनके साथियों ने झोपड़पट्टियों में बालकों को हर रविवार को कोचिंग देने का शुरू किया गया है। युवाओं के इस कार्य के चलते गरीब एवं श्रमिक परिवार को लग रहा है कि उनके बच्चे भी उच्च शिक्षा प्राप्त कर इस गरीबी के शाप से मुक्त हो जाएंगे।


गरीब बच्चों की शिक्षा में हो रहा सुधार
श्रमिक परिवार के बच्चों में शिक्षा की भूख जगे और उनमें अनुशासन एवं स्वच्छता के गुण विकसित हो व स्वस्थ्य रहे, इसके लिए आणंद वल्लभविद्यानगर के अलग-अलग कॉलेजों के ७० से अधिक विद्यार्थी इस अभियान में जुड़े हैं। शहर के राज शिवालय के निकट नगर प्राथमिक स्कूल नम्बर-६ में व अमीन ऑटो के सामने स्थित झोपड़पट्टी में जाकर यह युवक बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर उन्हें शिक्षा देते हैं। गणित, विज्ञात सहित अलग-अलग विषयों की शिक्षा देने के प्रति इन युवकों का उद्देश्य है कि बच्चों की शिक्षा सुधरे। करीब एक वर्ष से जारी इस अभियान के चलते बालकों की शिक्षा में सुधार हुआ है और बालक ८० से ९५ प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण हो रहे हैं।


शिक्षा के साथ दे रहे संस्कार भी
मात्र शिक्षा ही नहीं, अपितु संस्कार कों सिंचन भी किया जा रहा है, जिससे यह बालक जब बड़े हो तो एक अच्छे नागरकि बनकर अच्छे समाज के निर्माण में अपना योगदान दे सकें। शिक्षा के साथ-साथ यह युवक श्रमित गरीब बालकों को नोटबुक, पुस्तक व यूनिफोर्म के लिए भी मदद करते हैं।


वरिष्ठ नागरिक भी देते हैं तीन घंटे का समय
यहां पर समाज के अनेक वरिष्ठ नागरिक भी तीन घंटे का समय देकर बालकों में संस्कारों का सिंचन करते हैं।


९५ से अधिक बालकों दे रहे शिक्षा
युवा एकता समिति के अध्यक्ष मयूर सुधार के अनुसार झोपड़पट्टी में रहनेवाले बालकों को भी अच्छी शिक्षा मिल सके, इस उद्देश्य के साथ करीब ७० से अधिक युवकों की टीम झोपड़पट्टी में रहने वाले ९५ से अधिक बच्चों को विभिन्न विषयों की शिक्षा दे रहे हैं।
दुबई से आईं प्रियंका पटेल भी प्रत्येक रविवार को गरीब एवं श्रमिक परिवार के बालकों को उच्च शिक्षित बनाने में योगदान देती हैं। दुबई में शिक्षा प्राप्त करने वाली प्रियंका का कहना है कि इस कार्य से खुशी मिलती है।