
Gandhinagar: हिन्दी सरकारी प्राथमिक स्कूल का सपना साकार
गांधीनगर. गांधीनगर में रोजगार के लिए बसे हजारों हिन्दीभाषियों को अपने बच्चों को हिन्दीभाषा पढ़ाने के लिए कोई हिन्दी सरकारी स्कूल नहीं था। मजबूरन इन लोगों को अपने बच्चों को गुजराती में या फिर अंग्रेजी माध्यमिक पढ़ाना पड़ता था। हिन्दी माध्यम में पढ़ाई से वंचित ऐसे बच्चों की राजस्थान समाज सार्वजनिक सेवा ट्रस्ट-गांधीनगर लगातार चिन्ता कर रहा था। इस ट्रस्ट ने गांधीनगर में ऐसे वंचित बच्चों के लिए हिन्दी माध्यम की सरकारी स्कूल खोलने के लिए स्थानीय सांसद, मंत्रियों, राज्य सरकार के शिक्षा विभाग और मुख्यमंत्री से भी संपर्क किया। दो दशकों की मेहनत के बाद आखिरकार इस ट्रस्ट की मेहनत रंग लाई और गांधीनगर के सेक्टर-28 में हिन्दी सरकारी प्राथमिक स्कूल खोलने को राज्य सरकार के शिक्षा विभाग ने हरी झंडी दी। अब इस ट्रस्ट ने हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने की मुहिम छेड़ी है। इसके लिए 14, सितम्बर हिन्दी दिवस पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कार्यालय में दस हजार पत्र भेजने की बीड़ा उठाया है। इसके लिए देशभर से पत्र मंगाए जा रहे हैं और डिजीटल के जरिए पत्र लिखवाए जा रहे है।
20 हजार से ज्यादा बसे हैं हिन्दीभाषी
राजस्थान समाज सार्वजनिक सेवा ट्रस्ट-गांधीनगर के मुकेश कुमार व्यास 'स्नेहिलÓ, जो समरस संस्थान साहित्य सृजन- भारत के राष्ट्रीय संस्थापक संयोजक भी हैं। व्यास ने बताया कि गांधीनगर और उसके आसपास करीब 15 से 20 हजार हिन्दीभाषी हैं, जो उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार प्रांतों से बसे हैं और किसी न किसी रोजगार से जुड़े हैं। कई ऐसे लोग हैं जो कई वर्षों से गांधीनगर में बसे हैं, लेकिन उनके बच्चों को पढ़ाई के लिए कोई भी हिन्दी सरकारी स्कूल नहीं है। ऐसे में मजबूरन इन लोगों के बच्चों को अंग्रेजी या गुजराती में पढ़ाई करनी पड़ती है।
उन्होंने बताया कि ऐसे में ट्रस्ट व अन्य हिन्दीभाषियों ने इनकी मजबूरी को समझा और हिन्दी सरकारी प्राथमिक स्कूल खोलने की कवायद शुरू की। करीब दो दशकों से हिन्दी स्कूल खोलने की कोशिश की जा रही थी। हरस्तर पर गुजारिश की गई और आखिरकार बीस दिन पहले ही राज्य सरकार के शिक्षा विभाग ने हिन्दी सरकारी प्राथमिक खोलने की मंजूरी दी है।
ट्रस्ट को स्कूल के संचालन की जिम्मेदारी
व्यास ने बताया कि यह प्राथमिक स्कूल गांधीनगर के सेक्टर-28 में सरकारी प्राथमिक स्कूल संख्या -2 के परिसर में शुरू की जाएगी। हालांकि इस स्कूल के लिए हिन्दी माध्यम के शिक्षकों की नियमित भर्ती नहीं होगी तब तक ट्रस्ट प्रवासी हिन्दीभाषा के शिक्षकों की भर्ती की जिम्मेदारी संभालेगा। इन हिन्दीभाषी प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती का खर्च भी ट्रस्ट को ही वहन करना होगा।
इनका रहा अहम योगदान
उन्होंने कहा कि हिन्दी सरकारी स्कूल का सपना साकार करने में ट्रस्ट के पदाधिकारी तुलसी माली, मांगीलाल गुर्जर, विक्रम सिंह राजपुरोहित, रमेशभाई पंचाल, विक्रम सिंह राजपूत, मधुभाई प्रजापति, मुकेश प्रजापति का भी विशेष सहयोग रहा।
दस हजार पत्र भेजेंगे राष्ट्रपति को
वे बताते हैं कि हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने के लिए समरस संस्थान साहित्य सृजन के जरिए हिंदी भाषा को राजभाषा के स्थान पर राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने के लिए एक साहित्यिक आंदोलन किया जा रहा है। इसके लिए संस्थान की देशभर में फैली इकाइयों के जरिए राष्ट्रपति को हिंदी सप्ताह पर दस हजार पत्र भिजवाने की कोशिश है। संस्थान की ओर से विधा कार्यशाला, विषय कार्यशाला, एकल काव्यपाठ, चित्र काव्यशाला, साप्ताहिक प्रतियोगिता, संवाद, वाद विवाद व काव्यगोष्ठीयों से भाषा प्रचार प्रसार किया जाता है।
840 हिन्दी काव्य गोष्ठियां की
वे बताते हैं कि संस्थान के जरिए अब तक 840 हिंदी काव्यगोष्ठियों का संचालन किया जा चुका है। 1000 से ज्यादा कवि, कवयित्रियों, साहित्यकारों को संस्थान ने सम्मानित किया है।
Published on:
15 Sept 2022 08:45 pm
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