
गुजरात में दो वर्षों में 313 शेरों, शेरनी व शावकों की मौत
- सबसे ज्यादा 152 शावक, 69 शेर और 90 शेरनी की मौत
गांधीनगर. गुजरातभर में पिछले दो वर्षों में 313 शेरों, शेरनी और शावकों की मौत हो गई, जिसमें वर्ष 2019 में 154 मौतें और वर्ष 2020 में 159 मौतें हुईं। इनमें सबसे ज्यादा 152 मौतें शावक की हुई हैं। जबकि शेरों की ७१ और ९० शेरनी की मौत हो गई। गुजरात विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान शेरों की मौत को लेकर लाठी से विधायक वीरजी ठुम्मर के सवाल के जवाब में राज्य सरकार के मंत्री गणपत वसावा यह जवाब दिया।
वसावा ने सदन में जवाब दिया कि वर्ष 1 जनवरी-2019 से 31 दिसम्बर, 2019 में 154 शेरों, शावकों और शेरनी की मौत हुई, जिसमें 33 शेरों की प्राकृतिक मौत, दो अप्राकृतिक समेत 35 शेरों की मौत हुई। वहीं 45 शेरनी की प्राकृतिक, तीन शेरनी की अप्राकृतिक समेत 48 शेरनी की मौत हुई। वहीं 69 शावकों की प्राकृतिक, 2 शावकों की अप्राकृतिक समेत 71 शावकों की मौत के किस्से सामने आए।
वहीं 1 जनवरी, 2020 से 31 दिसम्बर, 2020 तक 159 शेर, शेरनी और शावकों की मौत हो गई, जिसमें 36 शेरों की प्राकृतिक मौत हुई, जबकि अप्राकृतिक से किसी शेर की मौत का किस्सा सामने नहीं आया। वहीं 32 शेरनी की प्राकृतिक मौत, 10 शेरनी की अप्राकृतिक समेत 42 शेरनी की मौत हुई। वहीं 75 शावकों की प्राकृतिक मौत, 6 शावकों की अप्राकृतिक समेत 81 शावकों की मौत हो गई।
अप्राकृतिक मौतें रोकने को उठाए कदम
उन्होंने शेर, शेरनी और शावकों की अप्राकृतिक मौतों को रोकने लेकर उठाए कदमों की जानकारी देते कहा कि क्षेत्रीय कर्मचारियों को वाहन, हथियार, वॉकीटॉकी, टेबलेट से सुसज्जित किया है, जो निरंतर गश्त लगाते हैं और रात्रि गश्त भी करते हैं। समय-समय पर पुलिस, वन विभाग और पश्चिम गुजरात विद्युत कंपनी लिमिटेड (पीजीवीसीएल) विभाग की ओर से संयुक्त गश्त भी लगाई जाती है। वन्य जीवों को बचान के लिए रेपिड एक्शन टीम तथा रेस्क्यू टीम का भी गठन किया गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि चेकिंग प्वाइन्ट्स पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। वहीं हाईटेक मोनिटरिंग यूनिटी भी कार्यरत है। 293 वन्य प्राणी मित्र और 160 ट्रैकर्स कार्यरत हैं। जहां खुले कुएं हैं वहां पैरापीट वॉल बनाकर सुरक्षित किया गया है ताकि शेर कुएं में नहीं गिरे। शेर या अन्य वन्य प्राणियों को बीमारी, हादसों के समय तत्काल उपचार मुहैया कराने के लिए वेटरनरी ऑफिसर की नियुक्ति की गई। लायन एम्बुलेंस, वन्य प्राणी उपचार केन्द्र कार्यरत किए गए हैं। शेरों पर लगातार निगरानी के लिए उन्हें रेडियो कोलरिंग किया गया है ताकि उनके स्थान का पता लगाया जा सके। अभ्यारण्य क्षेत्रों से गुजरने वाले सार्वजनिक मार्गों पर स्पीड ब्रेकर, साइन बोर्ड भी लगाए गए हैं। राजुला -पीपावाव के बीच रेलवे पटरी के आसपास चेनलिंक फेसिंग की गई हैं।
उन्होंने कहा कि गुजरात और देश के गौरव एशियाई शेरों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार हमेशा कटिबद्ध है। मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने भी लगातार मंथन कर शेरों के संरक्षण के लिए समयबद्ध आयोजन किया है। जहां वर्ष 2015 में जब शेरों की गणना की गई थी उस समय 523 गणना थे। जबकि वष4 2020 में फिर से गणना हुई, जिसमें 674 शेरों पाए गए। इस तरीके से शेरों की संख्या में 29 फीसदी बढ़ी है।
Published on:
05 Mar 2021 08:44 pm

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