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Ahmedabad, GNLU जानिए कानून संचरना पर क्या मानते थे महात्मा गांधी

GNLU, Law, Ganthi thought, Gujarat, Gandhi 150 birth year जीएनएलयू में 'कानून एवं न्याय पर गांधी विचार' विषय पर परिचर्चा, गांधी मानते थे कि कानूनी संरचना सदभाव आधारित होनी चाहिए ना कि प्रतिस्पर्धा आधारित: डॉ जोशी  

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Ahmedabad, GNLU जानिए कानून संचरना पर क्या मानते थे महात्मा गांधी

Ahmedabad, GNLU जानिए कानून संचरना पर क्या मानते थे महात्मा गांधी

अहमदाबाद. एम.के.यूनिवर्सिटी भावनगर के पूर्व कुलपति डॉ.विद्युत कुमार जोशी ने कहा कि 'महात्मा गांधी एक नैतिक मानवतावादी थे। वे मानते थे कि कानूनी संरचना सद्भाव आधारित होनी चाहिए ना कि प्रतिस्पर्धा पर आधारित। महात्मा गांधी ने चाहे भारत हो या अफ्रीका जहां भी कानूनी प्रेक्टिस की वहां सद्भाव की भावना से की।'
डॉ.जोशी ने यह विचार शुक्रवार को Gujarat National law university गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (जीएनएलयू) में 'कानून एवं न्याय पर गांधी विचार' विषय पर आयोजित पैनल डिस्कशन (परिचर्चा) में व्यक्त किए।

पूर्व राष्ट्रपति के प्रेस सचिव रहे सत्य नारायण साहू ने कहा कि महात्मा गांधी मानते थे कि विचार विमर्श, परामर्श की प्रक्रिया के माध्यम से कानून बनाना चाहिए।
पीडीपीयू के स्कूल ऑफ लिबरल साइंस के प्राध्यापक प्रो. प्रदीप मलिक ने सामाजिक न्याय, पंचायती राज और ग्रामीण विकास की गांधीवादी अवधारणा पर अपने मंतव्य व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि गांधी के अनुसार सभी लोगों के कल्याण में ही व्यक्ति का कल्याण निहित है।
केन्द्रीय विश्वविद्यालय गुजरात के गांधी विचार एवं शांति अध्ययन केन्द्र के सहायक प्राध्यापक प्रो.धनंजय राय ने कहा कि महात्मा गांधी कोर्ट को एक प्रयोगशाला के रूप में उपयोग में लेते थे।
महात्मा गांधी की 150वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित इस परिचर्चा में साबरमती आश्रम की झंखनाबेन ने जीएनएलयू पहुंचकर विद्यार्थियों को चरखे की अहमियत बताई और चरखे से सूत कातना सिखाया।

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