
पावागढ़ पर कालिका माता का प्रसिद्ध मंदिर।
राजेश भटनागर
अहमदाबाद. पर्वतों के संरक्षण के लिए जागरुकता फैलाने को लेकर हर साल 11 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस मनाया जाता है। जलवायु परिवर्तन के कारण संयुक्त राष्ट्र संघ (यूनाइटेड नेशंस-यू.एन) ने 2002 में टिकाऊ पर्वत विकास का अंतरराष्ट्रीय वर्ष घोषित किया था। 2003 से अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस मनाया जा रहा है। गुजरात में चारो कोनों में पर्वत पर मंदिरों के कारण खनन रुक रहा है, पर्यावरण का संरक्षण हो रहा है और पर्वतों पर विराजमान माता आशीर्वाद दे रही हैं।
अंबाजी : मां के शक्तिपीठों में शामिल
उत्तर गुजरात में अरावली की पर्वत श्रृंखला के बीच गुजरात-राजस्थान की सीमा पर बनासकांठा जिले की दांता तहसील में अंबाजी कस्बे के समीप गब्बर पर्वत पर अंबाजी माता का प्रागट्य स्थल गब्बर पर्वत पर माना जाता है। यहां मां सती का हृदय गिरा था। वहां तक पहुंचने के लिए रोप-वे की सुविधा भी उपलब्ध है। वहां 51 शक्ति पीठ मंदिरों का निर्माण भी करवाया गया है। गब्बर पर्वत के समीप अंबाजी कस्बे में अंबाजी माता का मंदिर स्थित है। यह मां के 51 शक्तिपीठों में शामिल है। अंबाजी माता के मंदिर में माताजी की मूर्ति नहीं है। यहां पवित्र श्री यंत्र की पूजा की जाती है, इसे आंखों से देख पाना मुश्किल है।
पावागढ़ : मां के शक्तिपीठों में से एक
मध्य गुजरात के पंचमहाल जिले की हालोल तहसील में पावागढ़ पर कालिका माता का प्रसिद्ध मंदिर है। यह भी मां के शक्तिपीठों में से एक है। माना जाता कि यहां पर माता के दाहिने पैर की अंगुली गिरी थी। यहां आवागमन के लिए रोप-वे की सुविधा उपलब्ध है। कालिका माता मंदिर का हाल ही जीर्णोद्धार करवाज जाने के बाद यहां 500 वर्ष के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से मंदिर पर पताका चढ़ाई गई।
गिरनार पर्वत पर अंबा माता मंदिर तक पहुंचने के लिए एशिया का सबसे ऊंचा रोपवे
सौराष्ट्र के जूनागढ़ जिले में गिरनार पर्वत पर भी अंबा माता का मंदिर स्थित है। यहां एशिया के सबसे ऊंचे गिरनार रोपवे का निर्माण करवाया गया है। रोपवे बनने के बाद आवागमन में सुविधा हो गई है।
चोटीला पर्वत पर चामुंडा माता के मंदिर में है स्वयंभू मूर्ति
सौराष्ट्र में राजकोट से करीब 60 किमी दूर सुरेंद्रनगर जिले के चोटीला में समुद्र तल से 1100 फीट की ऊंचाई पर पहाड़ी पर स्थित चामुंडा माता का मंदिर स्थित है। जब राक्षस चंड और मुंड देवी महाकाली पर विजय प्राप्त करने के लिए आए थे, तब हुई लड़ाई में देवी ने उनके सिर काट दिए। वह सिर मां अंबिका को भेंट कर दिए, बदले में महाकाली से कहा कि उन्हें चामुंडा देवी के रूप में पूजा जाएगा। चामुंडा माता के मंदिर में मूर्ति स्वयंभू है। भक्त 700 से अधिक सीढिय़ां चढकऱ मंदिर तक पहुंच सकते हैं।
सीमा पर माता नो मढ पर हैं आशापुरा माता
भारत-पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर गुजरात के कच्छ जिले की लखपत तहसील में पहाड़ों से घिरे माता नो मढ (पर्वत) गांव में आशापुरा माता का मंदिर स्थित है। पर्यटन विकास के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही 32.71 करोड़ रुपए के कार्यों का शिलान्यास किया था।
इस वर्ष की थीम वुमन मूव माउंटेन
इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस की थीम वुमन मूव माउंटेनज है। जो लैंगिक समानता को बढ़ावा देने का एक अवसर है। संयुक्त राष्ट्र ने 2022 को सतत पर्वतीय विकास का अंतरराष्ट्रीय वर्ष घोषित किया है।
Published on:
10 Dec 2022 11:16 pm
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