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डेढ़ किलोमीटर लम्बी होगी गु्डज ट्रेन

समर्पित मालभाड़ा गलियारे से माल ढुलाई में आएगी रफ्तार

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डेढ़ किलोमीटर लम्बी होगी गु्डज ट्रेन

अहमदाबाद. पश्चिमी समर्पित माल भाड़ा गलियारा (डीएफसीसी) पुरजोर से चल रहा है। यह गलियारा दिल्ली के निकट रेवाड़ी से मुंबई तक है। इस कोरिडोर पर रेवाडी से अटेली तक ट्रेन दौड़ाई जा चुकी है।
डेडीकैटेड फ्रेट कॉरिडोर कार्पोरेशन लिमिटेड (डीएफसीसीआईएल) के प्रबंध निदेशक अनुराग कुमार सचान के मुताबिक मौजूदा समय में गुड्ज ट्रेनें चलाकर परीक्षण किया जा रहा है। बाद में रेवाड़ी से अटेली और फुलेरा से मारवाड तक भी काम इसी साल दिसम्बर तक कर लिया जाएगा। वहीं आबू रोड से वडोदरा तक मार्च 2020 तक कार्य पूर्ण हो जाएगा। इस गलियारे पर गुड्ज ट्रेनें बिजली से दौड़ेगी, जिससे न सिर्फ माल ढुलाई में रफ्तार आएगी बल्कि प्रदूषण भी नहीं होगा। यह ट्रेन करीब डेढ़ किलोमीटर लम्बी होगी, , जिसमें 1400 ट्रकों के बराबर माल ढुलाई हो सकेगी।
एक अधिकारी ने बताया कि इस गलियारे पर आबू रोड से वडोदरा तक मार्च 2020 तक कार्य पूर्ण हो जाएगा। मौजूदा समय में बालाघाट, सिद्धपुर में सरस्वती नदी, मेहसाणा में खारी नदी, साबरमती और मही नदियों पर छोटे-बड़े ब्रिजों का निर्माण चल रहा है। ब्रिजों का निर्माण खत्म होने के बाद गिट्टी और पटरियां बिछाई जाएंगी। इस गलियारे पर सिर्फ गुड्ज ट्रेन ही दौड़ेंगी। ये गुड्ज ट्रेन अहमदाबाद नहीं आएगी बल्कि कलोल के निकट पानसर से साणंद चलेंगी। पालनपुर के निकट चडोतर से गुड्ज ट्रेन गांधीधाम और साणंद से सौराष्ट्र के लिए गुड्ज ट्रेनों से माल ढुलाई होगी। गलियारे पर स्टेशन भी अलग-अलग होंगे, जिसमें न्यू मेहसाणा, उमरदाशी, घुमासणा स्टेशन होंगे।
ऐसे अलग होगा गलियारा
यह गलियारा रेलवे से बिलकुल अलग होगा, मौजूदा समय में जहां 52 से 58 रैक की गुड्ज ट्रेनें दौड़ती है, वहीं इस गलियारे में दोगुनी लम्बाई वाली गुड्ज टे्रनें होंगी, जिसमें 100 भी ज्यादा रैक होंगे। मौजूदा समय जहां गुड्ज ट्रेन करीब पांच हजार टन माल ढुलाई करती है। वहीं इस गलियारे पर चलने वाली गुड्ज ट्रेनें 13 हजार टन तक माल ढुलाई कर सकेगी। जहां मौजूदा गुड्ज ट्रेनों की औसतन रफ्तार 26 किलोमीटर है, जबकि इस गलियारे पर गुड्ज ट्रेनें 100 किलोमीटर की रफ्तार से दौड़ेंगी। गुड्ज ट्रेनों की औसतन गति 75 हजार प्रति घंटे होगी। 40 किलोमीटर पर एक स्टेशन है।