गांधीनगर. गुजरात विधानसभा में शनिवार को पेश किए गए गुजरात पब्लिक यूनिवर्सिटी विधेयक का कांग्रेस विधेयकों ने विरोध किया। वहीं सत्ता पक्ष के विधायकों ने विधेयक की सराहना की।
पोरबंबर से कांग्रेस विधायक अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि विधेयक से शिक्षा क्षेत्र पर सरकार का नियंत्रण मजबूत होगा। यह विधेयक शिक्षा को सरकार की दासी बनाएगा। यहां तक कि दुनिया के सबसे पुराने नालंदा और तक्षशिला विश्वविद्यालयों पर भी किसी पूर्व राजा का नियंत्रण नहीं था। वहीं, यह कानून सरकार के नियंत्रण का विस्तार करेगा। अतीत में, सरकार ने कभी भी महात्मा गांधी की ओर से स्थापित गुजरात विधापीठ में हस्तक्षेप नहीं किया।उन्होंने कहा कि पूर्व में छात्रवृत्ति और फीस माफ करने के फैसले के खिलाफ कोई आंदोलन हुआ तो यह स्वायत्तता के चलते हुआ। गुजरात में जिस यूनिवर्सिटी को स्वायत्तता और आजादी है, उसी भारत की शीर्ष 10 यूनिवर्सिटियों में गुजरात की एक भी यूनिवर्सिटी नहीं है। इससे शिक्षकों, संकाय सदस्यों को अभिव्यक्ति की आजादी से वंचित कर दिया जाएगा। यह गुजरात को आगे नहीं बल्कि पीछे ले जाएगा। गुजरात की 108 में से 88 यूनिवर्सिटी और 2468 कॉलेजों में से 2371 के पास राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नेक) के प्रमाण-पत्र नहीं हैं। मोढवाडिया ने कहा कि यह विधेयक शिक्षा को पीछे ले जाएगा इसलिए इसका समर्थन नहीं किया जा सकता।
प्रवेश लेने में विद्यार्थियों को होगी आसानी : डॉ. पाडलिया
राजकोट जिले के धोराजी से भाजपा विधायक डॉ. महेंद्र पाडलिया ने कहा कि वे राजकोट की सौराष्ट्र यूनिवर्सिटी के कुलपति थे, तब एक से दूसरी यूनिवर्सिटी में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की समस्याओं को जाना, तत्कालीन शिक्षा मंत्री को यूनिवर्सिटी के लिए समान कानून बनाने का विधेयक लाने की सलाह दी थी। इस विधेयक के पारित होने के बाद नई यूनिवर्सिटी की स्थापना के लिए विधानसभा में विधेयक लाने की जरूरत नहीं होगी। एक समान पाठ्यक्रम के प्रावधान के कारण इस विधेयक के पारित होने के बाद एक से दूसरी यूनिवर्सिटी में प्रवेश लेने में विद्यार्थियों को आसानी होगी, इसलिए वे इस विधयेक का समर्थन करते हैं।
सरकारी कर्मचारियों के समान काम करेगा स्टाफ : चावड़ा
आणंद जिले के आंकलाव से कांग्रेस विधायक व विधानसभा में कांग्रेस पक्ष के नेता अमित चावड़ा ने कहा कि विधेयक पारित होेने के बाद पब्लिक यूनिवर्सिटी का स्टाफ सरकारी कर्मचारियों के समान काम करेगा। तीन दशक में शिक्षा का जितना सरकारीकरण व निजीकरण नहीं हुआ, उतना सरकारीकरण यह विधेयक पारित होने के बाद होगा इसलिए इस पर पुनर्विचार किया जाए। इससे स्वायत्ता, विविधता, विशेषता खत्म होगी। कुलपतियों को यूनिवर्सिटियों की जमीन बेचने का छिपा एजेंडा लागू करने व सत्ता के केंद्रीयकरण का दुरुपयोग होने के कारण वे इस विधेयक का विरोध करते हैं।
यूनिवर्सिटी के बीच स्पर्धा बढ़ेगी : ठाकर
अहमदाबाद के वेजलपुर से भाजपा विधायक अमित ठाकर ने कहा कि उन्होंने विद्यार्थी काल में कॉलेजों में गुरु-शिष्य परंपरा स्थापित की। 6 बार गुजरात यूनिवर्सिटी के सिंडीकेट सदस्य रहे ठाकर ने कहा कि इस विधेयक के पारित होेने के बाद यूनिवर्सिटी के बीच स्पर्धा बढ़ेगी। वैश्विक विशेषज्ञों से पढ़ने का विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। पब्लिक यूनिवर्सिटी के कैंपस विदेश में भी खोले जा सकेंगे।
गुजरात में उच्च शिक्षा विश्वस्तरीय बनेगी : निमिषा
पंचमहाल जिले के मोरवा हड़फ से भाजपा विधायक निमिषा सुथार ने कहा कि यूनिवर्सिटी का प्रबंधन व संचालन गुणवत्तायुक्त बनेगा। कामकाज में पारदर्शिता लाई जा सकेगी और गुजरात में उच्च शिक्षा विश्वस्तरीय बनेगी।गोहिल ने विरोध जताया
उधर गुजरात प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष शक्तिसिंह गोहिल ने इस विधयेक पर अपना विरोध जताया है। साथ ही मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस संबंध में विचार करने के लिए कहा है। उन्होंने इस विधेयक को शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाला बताया।