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किसानों की बजाय उद्योगों को ज्यादा बिजली देती है सरकार : परमार

विपक्षी कांग्रेस ने राज्य विधानसभा में आरोप लगाया कि राज्य की भाजपा सरकार किसानों की बजाय उद्योगों को ज्यादा बिजली देती है।

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Government gives more power to farmers than farmers: Parmar

Government gives more power to farmers than farmers: Parmar

गांधीनगर।विपक्षी कांग्रेस ने राज्य विधानसभा में आरोप लगाया कि राज्य की भाजपा सरकार किसानों की बजाय उद्योगों को ज्यादा बिजली देती है।


बजट में ऊर्जा व पेट्रोकेमिकल्स विभाग की मांग पर चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस के उपनेता शैलेष परमार ने बताया कि राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता में लगातार वृद्धि हुई है वहीं बिजली उत्पादन में कमी आई है। यही स्थिति राज्य सरकार के तहत आईपीपीएस क्षेत्र की है। वहीं राज्य में केन्द्र सरकार के मातहत बिजली कंपनियों की बिजली उत्पादन क्षमता के साथ-साथ विजली उत्पादन में वृद्धि देखी गई है।
उन्होंने आंकड़ा देते हुए कहा कि वर्ष 2001ृ-02 के मुकाबले 2016-17 में बिजली क्षमता की वृद्धि के मुकाबले बिजली उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। राज्य की भाजपा सरकार ने अपने मातहत बिजली की क्षंमता में वृद्धि करने के लिए करोड़ों रुपए का खर्च किया है।

किसानों के लिए पर्याप्त बिजली देने की राज्य सरकार की बातों का अनुचित बताते हुए परमार ने कहा कि गुजरात की बजाय देश के अन्य 16 राज्यों में किसानों को 24 घंटे से लेकर 8 घंटे तक बिजली दी जाती है। जबकि गुजरात में राज्य के किसानों को सिर्फ 8 घंटे बिजली दी जाती है जो दिन-रात के रोटेशन के हिसाब से होती है।

निजी कंपनियों से 47 हजार करोड़ की बिजली खरीदी

राज्य की बिजली की मांग में लगातार वृद्धि हुई है। वर्ष 2011-12 से लेकर वर्ष 2016-17 के छह वर्षों में घरेलू उपयोग, वाणिज्यिक, खेती, रेलवे व अन्य के लिए 2 लाख 33 हजार 707 मिलियन यूनिट की बिजली उपयोग की जरूरत के मुकाबले राज्य की बिजली कंपनियों व राज्य के आईपीपीएस बिजली स्टेशनों में 1 लाख 60 हजार 572 मिलियन यूनिट का उत्पादन हुआ। राज्य में बिजली उपयोग के लिए सिर्फ 73 हजार 135 मिलियन यूनिट बिजली राज्य सरकार को खरीदनी पड़ी इसके मुकाबले राज्य सरकार ने पांच निजी बिजली उत्पादकों से 1.75 लाख मिलियून यूनिट बिजली ख्रीदी। इनमें सीएलपी इंडिया, अदाणी पावर लि., एस्सार पावर गुजरात, एसीबी इंडिया लि. व कोस्टल गुजरात पावर कंपनी शामिल हैं।

इस तरह राज्य सरकार ने 1 लाख 2 हजार 650 मिलियन यूनिट बिजली की अतिरिक्त खरीद की है। यह अतिरिक्त बिजली औद्योगिक क्षेत्रों के लिए निजी बिजली कंपनियों से 47, 305.57 करोड़ के खर्च से खरीदी गई।

राज्य में 16 वर्षों में बिजली के घरेलू उपयोग में 9961 मिलियन यूनिट, खेती के क्षेत्र में 1832 मिलियन यूनिट व औद्योगिक क्षेत्र में 29,025 मिलियन यूनिट की वृद्धि हुई है।

गुजरात में 3.05 रुपए प्रति यूनिट बिजली

परमार ने यह कहा कि देश भर में गुजरात बिजली के दर में 15वें स्थान पर है। गुजरात से ज्यादा सस्ती बिजली देश के अन्य 14 राज्य देती है। राज्य में सरकारी बिजली कंपनी प्रथम डेढ़ यूनिट के 3.05 रुपए तथा अहमदाबाद व सूरत में टोरेन्ट कंपनी प्रथम डेढ़ यूनिट के 3.20 रुपए भाव लेती है।

पांडिचेरी व दमण-दीव में 1.10 रुपए, गोवा में 1.30 रुपए, आंध्र प्रदेश में 1.45 रुपए, आंध्र प्रदेश व तेलंगाणा में 1.50 रुपए, जम्मू-कश्मीर में 1.54 रुपए, तमिलनाडु में 2.50 रुपए, ओडिशा में 2.50 रुपए, उत्तराखंड में 2.55, केरल में 2.90 रुपए, उत्तर प्रदेश व झारखंड में 3 रुपए प्रति यूनिट बिजली है।

गुजरात से ज्यादा 14 राज्यों में सरप्लस बिजली

राज्य सरकार वर्षों से बिजली सरप्लस की बात करती है, लेकिन यह बात वर्ष 2017-18 के भारत सरकार के केन्द्रीय बिजली नियामक लोड जनरेशन बैलेन्स की रिपोर्ट के अनुसार गुजरात में 4.1 सरप्लस बिजली है। गुजरात से ज्यादा 14 राज्यों में सरप्लस बिजली है। उन्होंने आंकड़े देते हुए कहा कि सिक्किम में 99.1 फीसदी सरलस बिजली है। मेघायल में 65.6 फीसदी, मिजोरम में 52.8 फीसदी, हिमाचल प्रदेश में 48.6 फीसदी, महाराष्ट्र में 14.8 फीसदी, तमिलनाडु में 14.7 फीसदी, नागालैण्ड में 8.4 फीसदी, मध्य प्रदेश में 8.1 फीसदी, राजस्थान में 7.8 फीसदी, ओडिशा में 6.6 फीसदी, पश्चिम बंगाल के 5.7 फीसदी, छत्तीसगढ़ में 4.4 फीसदी, दमण व दीव में 4.3 फीसदी सरप्लस बिजली है।